बहराइच। साहब... मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महिला सशक्तिकरण की मुहिम के तहत मुझे शौचालय के संचालन का कार्य मिला था। मैं अपने कार्य को पूरी ईमानदारी के साथ कर रही थी। शौचालय संचालन से मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी थी और मै भी सशक्त हो रही थी। मोदी-योगी के इन प्रयासों का मैं प्रचार कर रही थी।
लेकिन यह बात समुदाय विशेष के प्रधान को नागवार गुजरी और उसने मुझे कई बार टोका। मेरे न मानने पर मुझे बिना किसी नोटिस के तुगलकी फरमान के तहत हटा दिया।उक्त बातें जरवल विकासखंड के ग्राम पंचायत उपधी निवासी शौचालय संचालिका रामसंवारी ने लगाया। उसका कहना है कि ग्राम प्रधान प्रतिनिधि एक दूसरी राजनीतिक पार्टी से प्रेरित हैं और उसके गुणगान का दबाव बना रहे थे।
दलित रामसंवारी ने आरोप लगाया कि उसे हटाने के लिए नियमों की भी धज्जी उड़ाई गईं। न तो सचिव ने और न ही प्रधान ने कभी शौचालय की जांच की और न ही कभी कोई नोटिस दी। सीधे उससे शौचालय की चाभी छीन कर दूसरे को सौंप दी। रामसंवारी ने बताया कि अब वह मुख्यमंत्री के दरबार में जाकर गुहार लगाएंगी।
पति को दी जातिसूचक गाली, जमकर पीटा
दलित महिला रामसंवारी ने आरोप लगाया कि प्रधान प्रतिनिधि ने भाजपा की तरफदारी करने पर उसके पति को जाति सूचक गाली दी और जमकर पीटा। इस पर प्रधान प्रतिनिधि अब्बास खां के खिलाफ जरवलरोड थाने में मुकदमा भी दर्ज करवाया है।
प्रकरण संज्ञान में आया है। अगर शौचालय संचालिका के साथ किसी भी प्रकार से गलत किया गया है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राघवेन्द्र द्विवेदी, डीपीआरओ