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15 दिन पहले खुला ब्लड बैंक तस्करी में शामिल

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बहराइच। जिले के रिसिया मोड़ के पास 15 दिन पहले शुरू हुआ हसन ब्लड बैंक खून की तस्करी को लेकर चर्चा में आ गया है। दरअसल, एसटीएफ ने शुक्रवार को लखनऊ में तस्करों को पकड़ा था। पूछताछ में तस्करों ने इस ब्लड बैंक को भी खून सप्लाई करने की बात कुबूल की थी। इसके बाद ये यह ब्लड बैंक भी एसटीएफ के रडार पर है। जाहिर है कि खून की तस्करी की आंच अब बहराइच तक पहुंच चुकी है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इससे अनजान हैं। जांच कराकर कार्रवाई करने की बात जरूर कह रहे हैं। वहीं, जानकारों का कहना है कि बहराइच के ब्लड बैंक से तस्करों के तार जुड़े होने की बात सामने आई है। ऐसे में पूरी तराई में इनका जाल फैले होने की आशंका है।
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जिले में सरकारी व निजी नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों को जरूरत पड़ने पर जिला चिकित्सालय में स्थापित ब्लड बैंक से खून मुहैया कराया जाता है। निजी नर्सिंग होम में ब्लड संकलित करने व मरीजों को उपलब्ध कराने की कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं, करीब 15 दिन पहले ही रिसिया मोड़ स्थित हसन ब्लड बैंक को रक्त संकलन करने व मरीजों को उपलब्ध कराने का लाइसेंस जरूर मिला है। यह लाइसेंस स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिया गया है। इस ब्लड बैंक की ओर से समय-समय पर रक्तदान शिविर भी लगाए जाते रहे हैं। यह ब्लड बैंक खुलने से क्षेत्र के लोगों में भी काफी खुशी थी कि जरूरत पर रक्त मिलने में सहूलियत होगी, लेकिन लखनऊ में पकड़े गये तस्करों के कुबूलनामे के बाद सवाल उठने लगे हैं।
तस्करों ने एसटीएफ को बताया है कि राजस्थान के कई ब्लड बैंकों के चिकित्सक व लैब टेक्नीशियन उनके संपर्क में थे। साथ ही वे चैरिटेबल ट्रस्टों के माध्यम से संचालित ब्लड बैंकों की ओर से आयोजित रक्तदान शिविरों में भी रक्त एकत्रित करते थे। इनमें से अधिकांश बैगों की इंट्री ब्लड बैंकों में नहीं की जाती थी। यही बैग तस्कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दूसरे राज्यों में बेच देते थे। तस्करों से बरामद ब्लड बैग रखने के लिए न तो फ्रीजर था और न ही इन पर एक्सपायरी की तिथि अंकित थी। ऐसे में यह रक्त पूरी तरह असुरक्षित था। इसे मरीज को देने से उसकी जान भी जा सकती थी।
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इस मामले में हसन ब्लड बैंक के संचालक का पक्ष जानने के लिए कॉल की गई तो अटेंडेंट ने रिसीव की। प्रश्न पूछने पर उसने कहा कि संचालक से बात करा रहां हूं। इसके बाद कॉल काट दी। दोबारा कॉल की गई तो रिसीव नहीं हुई।
मरीज को देने से पहले रक्त की कई जांचें की जाती हैं। इनमें टीबी, मलेरिया, हेपेटाइटिस व एड्स समेत कई जांचें शामिल हैं। बिना जांच किए मरीज को रक्त देने से उसकी जान भी जा सकती है। चिकित्सक को पहले ही सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि रक्त की सभी जांचें कर ली गई हैं या नहीं।
- डॉ. जेपी मौर्य, प्रोफेसर ब्लड बैंक, जिला चिकित्सालय
हसन ब्लड को को करीब 15 दिन पहले ही लाइसेंस दिया गया है। तस्करों ने इस ब्लड बैंक में भी रक्त की आपूर्ति करने की बात कही है। मामला काफी गंभीर है। जल्द ही जांच शुरू की जाएगी। कोई गड़बड़ी सामने आती है तो ब्लड बैंक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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- राजू प्रसाद, ड्रग निरीक्षक।
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