बहराइच। बाघ के बाद अब तीन लोगों को मौत के घाट उतारने वाली बाघिन भी वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गई। इससे वन विभाग व ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। बाघिन को कतर्नियाघाट रेंज कार्यालय लाया गया। यहां उसका परीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर गोरखपुर या लखनऊ के चिड़ियाघर भेजा जाएगा। वहीं, खास बात यह है कि पहले बाघ के हमले में तीन लोगों की मौत की बात कह रहे वन अधिकारी अब पलट गये हैं। अब उनका कहना है कि तीन लोगों की जान बाघिन ने ली थी। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि बाघिन के कुछ दांत व नाखून क्षतिग्रस्त पाए गये हैं जबकि बाघ के मामले में ऐसा नहीं था।
कतर्नियाघाट व लखीमपुर जिले का कुछ हिस्सा एक-दूसरे से सटा है। दोनों जिलों के बॉर्डर के आसपास पिछले कई दिनों से बाघ-बाघिन आतंक का पर्याय बने हुए थे। बाघिन ने तीन लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद लखीमपुर खीरी व कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग की संयुक्त टीम को गश्त पर लगाया गया था। तीन दर्जन से अधिक ट्रैप कैमरे भी लगाए गये। कैमरे में बाघ व बाघिन की तस्वीरें कैद र्हुइं थी। इसी के आधार पर अलग-अलग स्थानों पर पांच पिंजरे लगाए गये। 28 जून को पिंजड़े में एक बाघ कैद हुआ था। इसके बाद बाघिन को पकड़ने के लिए पिंजरे का स्थान बदला गया।
बृहस्पतिवार की सुबह बाघिन वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गई। इसके बाद दुधवा टाइगर रिजर्व, लखीमपुर के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक व कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ आकाशदीप बधावन मौके पर पहुंचे। इसके बाद बाघिन को कतर्नियाघाट रेंज कार्यालय लाया गया। डीएफओ आकाशदीप बधावन ने बताया कि बाघ के दांत व नाखून सुरक्षित पाए गये थे। ऐसे में बाघ को संघर्षशील नहीं कहा जा सकता जबकि बाघिन के कुछ दांत व नाखून आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं। इस आधार पर तय किया गया है कि हमले बाघिन ने ही किए थे।