बहराइच। लगभग 40 लाख की आबादी के लिए बने महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज में सिर्फ एक रेडियोलॉजिस्ट तैनात है। इनकी शनिवार को अचानक तबियत खराब हो जाने से मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड का कार्य पूरी तरह ठप हो गया। तीन दिनों से मेडिकल कॉलेज आने वाले मरीज व तीमारदार अल्ट्रासाउंड के लिए प्राइवेट जांच सेंटरों की दौड़ लगा रहे हैं और महंगे इलाज से दुखी तीमारदार शासन व प्रशासन को कोस रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में चल रही स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी का दंश लगातार मरीज व तीमारदार झेल रहे हैं। डॉक्टरों की कमी के चलते सस्ते व निशुल्क इलाज का सपना संजोये मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले मरीजों पर महंगे इलाज का बोझ पड़ रहा है। वहीं, डॉक्टरों की कमी के चलते पिछले तीन दिनों से मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड का कार्य पूरी तरह ठप है। गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट के तीन पद हैं, जिनमें से सिर्फ एक पद पर डॉ. बेंज की तैनाती है। बीते शनिवार को डॉ. बेंज के सीने में कुछ तकलीफ हुई जिसके बाद उन्होंने अपना ईसीजी जांच करवाई। जांच रिपोर्ट सही न आने पर डॉ. बेंज इलाज के लिए लखनऊ चले गए जिसके चलते पिछले तीन दिनों से मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड कार्य पूरी तरह ठप है।
बेहतर इलाज के लिए जिले के 14 ब्लॉकों व शहरी क्षेत्र में निवासरत ग्रामीण मेडिकल कॉलेज का रुख करते हैं। प्रतिदिन लगभग 1000 मरीज इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचते है, लेकिन यहां भी उन्हें सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं और उन्हें जांच के लिए बाहर प्राइवेट जांच केंद्रों पर जाना पड़ रहा है।
रेडियोलोजिस्ट की कमी के चलते मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड सेंटर में लगभग छह माह से ताला लटक रहा है। इलाज के लिए आने वाली प्रसूताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निजी जांच केंद्रों पर लाइन लगानी पड़ रही है जहां जांच के नाम पर उनसे 700 से 1000 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। बताते चलें कि महिला अस्पताल में पड़ोसी जनपद श्रावस्ती व नेपाल के मरीज भी इलाज के लिए आते हैं।
डॉ बेंज की तबीयत खराब होने की वजह से दिक्कत आई है। मेडिकल कॉलेज में रिक्त रेडियोलॉजिस्ट के पदों के लिए कई बार आवेदन मांगे गए हैं, लेकिन आवेदन न होने से पद रिक्त हैं। शासन स्तर पर प्रयास जारी हैं। जल्द ही समस्या का निदान कर लिया जाएगा।
-डॉ. ओपी पांडेय, सीएमएस