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सामूहिक विवाह में 11 जोड़े व बराती रहे भूखे

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नानपारा(बहराइच)। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह में अधिकारी योजना को पलीता लगा रहे है। ऐसा ही मामला मोतीपुर तहसील में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में सामने आया। गर्मजोशी के साथ ब्याह रचाने गए 11 जोड़े व बरातियों को प्रशासन ने बिना भोजन कराए ही वापस लौटा दिया। जिससे नव जोड़ों व बरातियों को मायूस होकर भूखे पेट वापस लौटना पड़ा। अधिकारियों ने यह कहकर भोजन कराने से मना कर दिया कि यह 11 जोड़े नगर पालिका नानपारा क्षेत्र के है। इनको भोजन कराना हमारी जिम्मेदारी नहीं है। जिला प्रशासन की यह कार्यप्रणाली सुनकर लोग शर्मनाक हरकत बता रहे है। अधिकारियों द्वारा दिए गए इस हवाले को सुनकर लोग हंसी उड़ा रहे है।
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जिले भर में अलग-अलग तहसीलों में हर्षोल्लास के साथ जिम्मेदार अधिकारियों की देखरेख में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम को आयोजित कराया गया, लेकिन मोतीपुर तहसील में अधिकारियों की कार्यप्रणाली ने सरकार की महत्वकांक्षी योजना पर पानी फेरने का काम किया है। मोतीपुर तहसील में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में 11 जोड़ो को नगर पालिका नानपारा के कर्मचारी अरशद सिद्दकी, राज किशोर, सभासद मोबीन अहमद व छत्रपाल वर्मा लेकर पहुंचे।
बताया जाता है कि हंसीखुशी विवाह कार्यक्रम का आयोजन हुआ। विवाह के बाद जब नव जोड़े व बरातियों को खाना खिलाने के लिए कर्मचारियों ने बीडीओ मोतीपुर रामेंद्र सिंह व नोडल अधिकारी उप निदेशक कृषि टीपी शाही ने बताया कि यहां पर शिवपुर ब्लॉक, बलहा ब्लॉक व मोतीपुर के जो जोड़ों का विवाह में नाम शामिल किया गया था।
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उन्हीं के लिए व्यवस्था कराया गया है। यह लोग नानपारा नगर पालिका क्षेत्र से आए है। इसलिए इनको भोजन कराना हमारी जिम्मेदारी नहीं है। नानपारा से 11 जोड़ो को ले जाने वाले कर्मचारियों व सभासदों ने बताया कि शादी के बाद भोजन न मिलने पर नव जोड़े व बराती को बिना भोजन के भूखे पेट लौटना पड़ा। जिसकी शिकायत एसडीएम से लेकर उच्चाधिकारियों से की गई है। मजबूरन खुशनुमा माहौल के बीच सभी को मायूस होकर भूखे पेट लौटना पड़ा।
मोतीपुर तहसील परिसर में आयोजित सामूहिक विवाह में 11 जोड़ों व बराती को खाना न मिलने व भूखे पेट जाने की चर्चा चारों ओर तेजी से हो रही है। जो लोग सुन रहे है वह अधिकारियों को इस शर्मनाक हरकत के लिए जिम्मेदार मान रहे है और उनकी कार्यशैली पर सवाल उठा रहे है।
जब इस संबंध में मोतीपुर एसडीएम ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी से बात की गई तो उन्होने पूरे मामले को सुनने के बाद जिला मुख्यालय पर आयोजित मीटिंग का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया। उनका यह रवैया जिला प्रशासन की छवि व मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी योजना को धूमिल करने की ओर इशारा कर रहा है।
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