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श्याम बाबा को साक्षी मानकर एक-दूजे के हुए 11 जोड़े

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बहराइच। कोट-पैंट व सिर पर सेहरा रखे दूल्हे तैयार थे। लाल जोड़े में सजी दुल्हनें चमक बिखेर रही थीं। जगह-जगह वेदियां सजी हुईं थीं। तभी बैंड-बाजे की आवाज गूंजी और बरात के आने की खबर मिली। वधू पक्ष के लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। उसके बाद विवाह की अन्य रस्में शुरू हुईं। गानों पर वर पक्ष के लोग थिरकते नजर आए। कुछ ऐसा नजारा सामूहिक विवाह के दौरान दिखा। सोमवार को शहर के बाहरी छोर पर स्थित एक लॉन एतिहासिक सामूहिक विवाह का गवाह बना। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 11 जोड़ों ने बाबा श्याम को साक्षी मानकर सात फेरे लेकर एक-दूसरे का हाथ थामा। श्याम गीत ने माहौल को खुशनुमा बना दिया। मेले जैसा माहौल रहा। विदाई के दौरान सभी की आंखें नम रहीं। दुल्हनें रोते हुए अपने ससुराल विदा हुई।
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लखनऊ-बहराइच हाईवे स्थित एक लॉन में सोमवार को सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित हुआ। शहर के समाजसेवी संदीप मित्तल आयोजक रहे। सामूहिक विवाह के मुख्य अतिथि दिल्ली से आए एंबुलेंसमैन हिमांशु कालिया व राष्ट्रपति से सम्मानित महिला एंबुलेंस चालक ट्रिंकल कालिया रहीं। दोपहर एक बजे बरात लॉन के बाहर पहुंची। शाही अंदाज में सिर पर सेहरे के साथ 11 दूल्हे एक साथ एक ही कोट पैंट में छटा बिखेरते हुए बरातियों के साथ प्रवेश कर रहे थे।
बराती गानों पर थिरकते हुए अंदर पहुंचे। सभी दूल्हों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। श्याम बाबा को साक्षी मानकर 11 जोड़ों ने सात फेरे लेते हुए एक-दूजे का हाथ थामा। सभी दुल्हनों को बेड व अलमारी समेत अन्य उपहार देकर विदा किया गया। ससुराल जाते समय दुल्हनों की आंखों से आंसू गिरे तो माहौल गमगीन हो गया। दुल्हनों के माता-पिता ने अपने दामाद से बेटी को खुश रखने की बात कहकर विदा किया। इस मौके पर विमल टेकड़ीवाल, मनीष पोद्दार, अंशिका मित्तल, अमित मित्तल, संजीव जैन, पूजा मित्तल, दीपक सत्या, सुरेश जायसवाल, साश्वत जोशी, धनंजय जायसवाल, ईशा केडिया, ललिता अग्रवाल, रोली गुप्ता, संजीव गुप्ता, पीयूष जैन, राकेश सैनी, अशोक सैनी, सोून वर्मा आदि मौजूद रहे।
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