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कैसरगंज तहसील में सिर्फ एसडीएम बनाम अधिवक्ता

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कैसरगंज (बहराइच)। कैसरगंज तहसील मुख्यालय पर कई दिनों से सिर्फ एसडीएम बनाम अधिवक्ता की जंग चल रही है। अधिवक्ता हड़ताल पर हैं और एसडीएम बेपरवाह हैं। दोनों की लड़ाई में 18 दिन से 3500 मामले लंबित हैं। वादकारी और फरियादी प्रतिदिन तहसील की परिक्रमा करते हैं और शाम को लौट जाते हैं। फरियादियों के दर्द से न तो अधिवक्ताओं को कोई फर्क पड़ रहा और न ही एसडीएम को। जिले के जिलाधिकारी भी सब देख रहे हैं, लेकिन दूसरे कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। तहसील की समस्याओं पर किसी की नजर नहीं पड़ रही है।
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कैसरगंज तहसील के अधिवक्ता कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार और एसडीएम के कार्य व्यवहार को लेकर क्षुब्ध हैं। हालात ये हैं कि अधिवक्ता एसडीएम को हटाने की मांग करने लगे हैं। मामला यहां तक बढ़ चुका है कि जब तक एसडीएम हटाए नहीं जाएंगे तब तक अधिवक्ता कार्य पर वापस नहीं लौटेंगे। आरोप तहसीलदार और तहसील कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार को लेकर भी हैं। शुक्रवार को अधिवक्ताओं की अनिश्चितकालीन हड़ताल का 18वां दिन था। इन 18 दिन में 35 सौ मामले विचाराधीन हो गए। कोर्ट में सुनवाई भी बंद है। हदबरारी, दाखिल खारिज आदि भी बंद है।
उपजिलाधिकारी सहित तहसील के सभी जिम्मेदार अधिकारी नियमित रूप से कोर्ट में नहीं बैठते हैं। जब इस संबंध में अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल उपजिलाधिकारी से मिलने गया तो उनसे अमर्यादित व्यवहार किया गया जिससे अधिवक्ता आक्रोशित हैं। उपजिलाधिकारी के स्थानांतरण तक कोर्ट बहिष्कार जारी रहेगा।
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- सूर्यभान सिंह, अध्यक्ष अधिवक्ता संघ
लगभग 40 वर्ष के कार्यकाल में पहली बार देख रहा हूं कि पूरा तहसील प्रशासन भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा है। तहसील के जिम्मेदार सब कुछ जानते हुए भी बेबस दिखाई दे रहे हैं। प्रमाण सहित शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। प्रशासनिक अक्षमता साफ नजर आती है।
- गंगाधर मिश्रा, पूर्व अध्यक्ष, अधिवक्ता संघ
तहसील की लचर व्यवस्था व अधिकारियों द्वारा कोर्ट की अनदेखी के संबंध में कई बार एसडीएम को अवगत भी कराया गया, लेकिन कोई हल नहीं निकला। उदासीनता व अभद्रता से क्षुब्ध होकर अधिवक्ताओं को आंदोलित होना पड़ा।
- विनोद सिंह चौहान, पूर्व अध्यक्ष
अधिवक्ताओं के मान-सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उपजिलाधिकारी के स्थानांतरण तक आंदोलन जारी रहेगा। इस संबधं में जिम्मेदार लोगों को जरूरी कार्रवाई करनी चाहिए।
नसीब अहमद खान, पूर्व अध्यक्ष
जलालपुर हरदी पट्टो निवासी विजय कुमार शुक्ला ने कहा कि वह प्रतिदिन चक्कर लगा रहा हैं। हड़ताल के कारण दिक्कत आ रही है। प्रशासन बेपरवाह है। फतेहपुर बिसैंधा निवासी रामफेरे यादव ने कहा कि पहले से ही काम बाधित है। अब हड़ताल होने का भी बहाना मिल गया। सिर्फ घर से तहसील तक दौड़ लगा रहे हैं। मतरेपुर निवासी धनलाल यादव और चिलवा निवासी गुड्डू अवस्थी ने बताया कि अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण दर-दर भटकना पड़ रहा है। अधिवक्ताओं और तहसील प्रशासन की लड़ाई में हमें क्यों खीचा जा रहा है। अभी हड़ताल खत्म होने के आसार भी नहीं दिख रहे हैं।
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