बहराइच। नगर के किसान स्नातकोत्तर महाविद्यालय को शीघ्र ही स्वायत्तशासी महाविद्यालय की उपलब्धि हासिल होगी। इससे महाविद्यालय के नये पाठ्यक्रमों के संचालन के साथ ही प्रवक्ताओं व छात्र-छात्राओं को विशेष सुविधाएं प्राप्त होंगी।
किसान स्नातकोत्तर महाविद्यालय जनपद का सर्वाधिक प्राचीन महाविद्यालय है। वर्तमान में यहां बीए, बीएससी, एमए, बीएड, बीकॉम, एमकॉम व इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। साथ ही महाविद्यालय में टूरिज्म व जल और मृदा संरक्षण जैसे विषयों में भी डिप्लोमा कोर्स का संचालन किया जा रहा है। महाविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या लगभग 11 हजार है। यहां एनसीसी व रोवर्स रेंजर्स की इकाइयां भी संचालित की जा रही हैं।
लगभग चार वर्ष पूर्व महाविद्यालय को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की गठित राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की ओर से ए ग्रेड प्रदान किया जा चुका है। परिषद की निरीक्षण टीम को महाविद्यालय में सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद मिली थीं। परिषद से ए ग्रेड प्राप्त होने के बाद महाविद्यालय प्रबंध समिति ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को स्वायत्तशासी महाविद्यालय के रूप में मान्यता प्रदान करने का अनुरोध किया था। महाविद्यालय की व्यवस्थाओं को देखते हुए आयोग ने निरीक्षण दल का गठन कर शीघ्र ही स्वायत्तशासी महाविद्यालय के रूप में मान्यता देने की तैयारियां तेज कर दी हैं। संवाद
स्वायत्तशासी महाविद्यालय के रूप में मान्यता मिलने पर महाविद्यालय को समुचित अधिकार प्राप्त हो सकेंगे। परीक्षक नियुक्त करने, परीक्षा पत्र बनाने, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन व नये पाठ्यक्रमों के संचालन तथा नई योजनाओं के क्रियान्वयन में कोई बाधा नहीं आयेगी। अभी तक विश्वविद्यालय से होने वाले सभी कार्य महाविद्यालय से ही संचालित होंगे। सिर्फ छात्र-छात्राओं की डिग्री ही विश्वविद्यालय से आयेगी।
महाविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव मेजर डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि जनपद या देवीपाटन मंडल ही नहीं पूरे पूर्वांचल में अब तक किसी भी महाविद्यालय को स्वायत्तशासी महाविद्यालय के रूप में मान्यता नहीं मिली हैं। ऐसे में महाविद्यालय को स्वायत्तशासी महाविद्यालय के रूप में मान्यता मिलने से पूरे पूर्वांचल में जनपद का गौरव बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि अब किसी भी कार्य के लिए विश्वविद्यालय के प्रति आश्रित नहीं होना पड़ेगा।