बहराइच। महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के न होने से अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। पुरुष अस्पताल में महिलाओं व पुरुषों का दो से तीन दिन पर अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है। जिन्हें अधिक जरूरत होती है वे मजबूरी में प्राइवेट अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को भर्ती कर इलाज किया जाता है। मंडल के सबसे बड़े अस्पताल में प्रतिदिन 300 से 400 महिलाओं की ओपीडी होती है। इनमें 10 से 15 महिलाओं को भर्ती किया जाता है। फिर भी महिला अस्पताल का अल्ट्रासाउंड कक्ष चिकित्सक विहीन है। चिकित्सक के न होने से महिला अस्पताल के मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता है।
मजबूरी में सभी बाहर अल्ट्रासाउंड कराने को मजबूर होते हैं। वहीं निम्न वर्ग के लोग अस्पताल में ही अल्ट्रासाउंड कराने को बाध्य होते हैं, लेकिन उनका पुरुष अस्पताल में दो से तीन दिन पर नंबर आता है। ऐसे में गंभीर रोगियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कुछ यही हाल शुक्रवार को भी रहा। महिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लगा रहा। मरीज बाहर से अल्ट्रासाउंड कराने को विवश हुए।
महर्षि बालार्क जिला चिकित्सालय के रेडियोलॉजिस्ट विभाग में पुरुष अस्पताल का अल्ट्रासाउंड कक्ष है। यहीं पर पुरुष और महिला अस्पताल के मरीजों का नि:शुल्क अल्ट्रासाउंड किया जाता है।
महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड संचालन के लिए चिकित्सक की तैनाती नहीं है। पूर्व में तैनात चिकित्सक का स्थानांतरण प्रयास के बाद भी नहीं रुक सका। इसके लिए पीएमएस संघ के साथ मैंने भी शासन को पत्र लिखा है। जल्द ही चिकित्सक की तैनाती होने पर अल्ट्रासाउंड शुरू हो जाएगा।
- डॉ. अनिल के साहनी प्राचार्य