बहराइच। प्रदेश सरकार ने आठ नदियों के कायाकल्प की योजना बनाई है। इसे बजट में शामिल किया गया है। इनमें बहराइच की टेढ़ी नदी भी है।
टेढ़ी नदी का उद्गम स्थल बहराइच की चित्तौरा झील है। इस नदी के कायाकल्प के लिए सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम को कार्य योजना तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नदी को दुरुस्त करने में लगभग 77 करोड़ खर्च होंगे। बहराइच से गोंडा तक टेढ़ी नदी को संवारा जाएगा। नदी के तट पर तालाब, पौधरोपण के साथ ही रिचार्ज कूपों की स्थापना की जाएगी।
नदियों को दुरुस्त करने के प्रति सरकार नित नए कदम उठा रही है। जिले की सरयू नदी के कायाकल्प की आवाज उठ रही थी। लेकिन इस बीच सरकार ने प्रदेश की लुप्त हो रही आठ नदियों की सूची तैयार की है।
इसमें बहराइच की टेढ़ी नदी भी शामिल है। टेढ़ी नदी का उद्गम स्थल चित्तौरा झील है। इसी झील से नदी निकलकर गोंडा जिले में घाघरा से संगम करती है। उपेक्षा के कारण टेढ़ी नदी लुप्त होने के कगार पर है।
कहीं-कहीं नदी का अस्तित्व लगभग खत्म हो रहा है। ऐसे में नदी को सहेजने के लिए सरकार ने सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम के अभियंताओं को कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए हैं।
ड्रेनेज खंड प्रथम के अधिशासी अभियंता शोभित कुशवाहा ने बताया कि आठ नदियों में टेढ़ी नदी शामिल है। ये नदी गोंडा में घाघरा नदी में मिल जाती है।
लगभग 65 किलोमीटर लंबी नदी को दुरुस्त करने के लिए शासन से कार्य योजना बनाने के निर्देश मिले हैं। इस पर लगभग 77 करोड़ खर्च होने की उम्मीद है।
नदी को अत्याधुनिक तरीके से दुरुस्त किया जाएगा। जिससे आगामी समय में नदी का अस्तित्व बरकरार रहे। उन्होंने कहा कि कार्य योजना बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है।
प्रत्येक किमी. पर बनेंगे तालाब
अधिशासी अभियंता शोभित कुशवाहा ने बताया कि प्रत्येक किलोमीटर पर तट से सटा हुआ एक तालाब बनाया जाएगा। कुछ दूरी पर रिचार्ज कूप भी बनाए जाएंगे, जिससे नदी के सूखने की स्थिति उत्पन्न न हो। 12 मास नदी का पानी कल-कल करता रहे।
तट पर लगाए जाएंगे पेड़
नदी के चौड़ीकरण और गहराई के साथ ही तट पर फलदार और छायादार पौधों का रोपण कराया जाएगा। जिससे तट पर पहुंचने वालों को सुकून का अहसास हो।
15 मार्च तक बजट मिलने की उम्मीद
अधिशासी अभियंता ने कहा कि चार दिन में कार्य योजना तैयार कर शासन को भेज दी जाएगी। कोशिश है कि 15 मार्च तक बजट जारी हो जाए।
बजट मिलते ही काम शुरू कराया जाएगा। वहीं, सरयू नदी की कार्य योजना पहले ही तैयार हुई थी। लेकिन फिलहाल उसकी फाइल बंद है। अब टेढ़ी नदी दुरुस्त होने के बाइ सरयू को संवारने की कवायद शुरू होगी।
उद्गम स्थल पर था राजा जनक के गुरु का आश्रम
राजा जनक के गुरु मुनि अष्टावक्र का आश्रम टेढ़ी नदी के उद्गम स्थल चित्तौरा झील के तट पर था। इसके कारण टेढ़ी नदी का धार्मिक महत्व भी है।
महाराजा सुहेलदेव की कर्मस्थली का गौरव होने के कारण नदी ऐतिहासिक पलों को भी अपने में संजोये है। गौरतलब हो कि आठ वर्ग किलोमीटर में फैली चित्तौरा झील से निकलने वाली टेढ़ी नदी पयागपुर में बघैल तालाब झील को जोड़ते हुए गोंडा की ओर बढ़ती है।