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मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की

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बागपत के विकास भवन स्थित दुर्गा मंदिर में माता के भजनों पर नृत्य करती महिलाएं - फोटो : BAGHPAT
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बागपत। चैत्र नवरात्रि में बृहस्पतिवार को छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की गई। मां कात्यायनी की पूजा अर्चना करने से श्रद्धालुओं को अर्थ, कर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती। ज्योतिषाचार्य राजकुमार शास्त्री ने बताया कि मां कात्यानी की विधि विधान से पूजा करने से सभी कष्टों से मुक्ति भी मिलती है।
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शास्त्रों के अनुसार, माता कात्यायनी को ब्रह्मा की मानस पुत्री माना जाता है। मां कात्यायनी की पूजा विधि-विधान से करने से हर काम में सफलता मिलती है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। देवी मां का स्वरूप स्वर्ण के जैसा चमकीला सिंह वाहन है। बृहस्पतिवार को मंदिर में कुमकुम, अक्षत, फूल सोलह श्रृंगार का समान चढ़ाकर और उनके प्रिय भोग शहद का भोग लगाकर विधि विधान से माता की पूजा अर्चना की गई। दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती का पाठ कराने के बाद माता की आरती कर प्रसाद वितरित किया गया। शुक्रवार को माता के सातवे स्वरूप ग्रह बाधा को दूर करने वाली माता के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा अर्चना की जाएगी। माता का सातवां रूप नकारात्मक, राक्षसी प्रवृतियों का विनाश करने और भक्तों की रक्षा करने वाली है।
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