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डीजल के बाद अब डीएपी के रेट बढने से किसानों पर पड़ेगी दोहरी मार

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रमाला। डीजल के लगातार बढ़ रहे दाम के बाद अब सरकार ने डीएपी के मूल्य में वृद्धि करने की घोषणा से किसानों पर दोहरी मार पड़ेगी। कुछ प्राइवेट उर्वरक विक्रेताओं ने शासनादेश जारी होने से पहले ही डीएपी के बढ़े हुए दाम वसूलने शुरू कर दिए है। किसानों को प्रिंट रेट 1200 रुपये होने के बावजूद किसानों से डीएपी के लिए 1350 रुपये वसूले जा रहे है।
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डीजल के दाम बढ़ने से सबसे अधिक किसान प्रभावित हो रहे है। किसानों को गन्न ढुलाई से लेकर फसलों की सिंचाई के लिए अधिक खर्च करना पड़ रहा है। डीजल के बाद अब उर्वरक विक्रेता किसानों से पुराने मूल्य की डीएपी पर नए दाम वसूल रहे है। किसानों का कहना है कि डीजल के बाद डीएपी के दाम बढ़ने से फसल की लागत और अधिक बढ़ जाएगी। दुकानों पर पुराना रेट प्रिंट होने के बावजूद नए दाम पर डीएपी ब्रिकी जा रही है। उन्होंने दुकान संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
बढ़ जाएगी फसल की लागत
डीजल के दाम लगातार बढ़ने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, अब डीएपी के दाम बढ़ने से फसलों की लागत बढ़ जाएगी। लगातार बढ़ रही डीजल और उर्वरक के दाम से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है- राजेन्द्र सिंह
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पुराने प्रिंट पर वसूले जा रहे नए दाम
सरकार ने डीएपी के दाम बढ़ाने के निर्देश दिए है, मगर प्राइवेट उर्वरक संचालकों ने अभी से मूल्य बढ़ा दिया है। दुकानदार किसानों को पुराने प्रिंट पर नए दाम में डीएपी की बिक्री कर रहे है। - ओमप्रकाश सिंह
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शासनादेश से पहले ही बढ़ा दिया मूल्य
डीएपी का 50 किलो का पैकेट का मूल्य 1200 रुपये है, जबकि दुकानदार किसानों से 150 अधिक रुपये अधिक वसूल रहे है। दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सुरेश शर्मा
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शासन ने डीएपी के दाम बढ़ाने की घोषणा की है, मगर अभी इस बारे में कोई दिशा-निर्देश नहीं मिला है। समितियों पर किसानों को पुराने रेट पर ही डीएपी की बिक्री की जा रही है। अगर कोई किसानों से प्रिंट रेट से अधिक मूल्य वसूल रहा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। - मोहसीन जमील, एआर कॉआपरेटिव
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