बागपत। दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर की राह में अभी तक अधिगृहीत जमीन के मुआवजे का विवाद रोड़ा बन रहा था। अब पेड़ कटान को लेकर भी सख्ती होने लगी है। इससे निर्माण का मामला लटकता दिख रहा है। दोनों मामले निपटने के बाद ही कॉरिडोर के बनने की राह आसान होगी। हालांकि अधिकारी सबसे पहले मुआवजे का विवाद निपटाने में लगे हुए है, जिससे पहले जमीन का मामला खत्म हो सके।
दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए बागपत के 27 गांव, मुजफ्फरनगर के सात गांव, शामली के 22 गांव, सहारनपुर के 25 गांव की करीब 1100 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। यह जमीन ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे से लेकर सहारनपुर तक है, जिसमें बागपत की करीब 350 हेक्टेयर जमीन शामिल है। इस अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे को लेकर विवाद चल रहा है। यह विवाद ही कॉरिडोर के लिए अभी तक रोड़ा बना हुआ था। 2015 के सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा दिया जा रहा है। किसान सर्किल रेट को बढ़ाकर मुआवजा देने की मांग कर रहे है। अब कॉरिडोर की राह में नया रोड़ा आ गया है। एनजीटी व कोर्ट ने कॉरिडोर के निर्माण के कारण काटे जाने वाले पेड़ों को लेकर सख्ती दिखाते हुए उस पर कोई भी फैसले को लेकर रोक लगाई है। चेयरमैन कृष्णपाल के अनुसार सबसे पहले मुआवजे का मामला चल रहा है। किसानों की मांगों के अनुसार ही मुआवजा देना होगा। इसके बाद ही पेड़ कटान होगा। मुआवजे के मुद्दे को लेकर 22 नवंबर को एनएचएआई कार्यालय पर धरना दिया जाएगा, जिसमें काफी किसान हिस्सा लेंगे।
पेड़ कटान को लेकर एनजीटी के आदेश की जानकारी है। कोर्ट का कोई आदेश अब आने की सूचना मिली है। जिस तरह का एनजीटी व कोर्ट का आदेश होगा, उसके अनुसार ही काम होगा। - अमित कुमार, एडीएम