बागपत। रेमडेसिविर इंजेक्शनों के तस्करों की बृहस्पतिवार को वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए पेशी हुई। पुलिस ने कोर्ट के सामने इंजेक्शन नकली साबित होने की लैब की रिपोर्ट पेश की। इसके बाद कोर्ट ने मामले में धारा-17बी बढ़ाने की अनुमति पुलिस को दे दी है। पुलिस पहले ही रेमडेसिविर खरीदने वाले तीमारदारों को तलाश कर रही है।
बागपत कोतवाली पुलिस, एसओजी और एफडीए की संयुक्त टीम 19 मई की रात राष्ट्र वंदना चैक पर वाहनों की चेकिंग कर रही थी। तभी एक एक्सयूवी गाड़ी से 60 इंजेक्शन रेमडेसिविर बरामद कर मनमोहन व उसके बेटे मुकुंद निवासी गांधी कालोनी, मुजफ्फरनगर व बिशन निवासी सलेमपुर चैक रानीपुर, हरिद्वार को गिरफ्तार किया था। दो आरोपी इस मामले में अभी भी फरार हैं। मामले की जांच कर रहे एसआई सुरेंद्र कुमार ने बताया कि बृहस्पतिवार को जेल में बंद तीनों आरोपियों की वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी हुई। इस दौरान पुलिस ने लैब से इंजेक्शनों की जांच की रिपोर्ट पेश की, जिसमें इंजेक्शन नकली साबित हो चुके थे। इसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया और आरोपियों के खिलाफ धारा 17बी बढ़ाने की पुलिस को अनुमति दे दी। उन्हाेंने बताया कि नकली इंजेक्शन से किसी की मौत हुई है तो उनके परिजनाें को पुलिस गवाह बनाएगी, ऐसे लोगाें की तलाश की जा रही है।
ड्रग इंस्पेक्टर वैभव बब्बर ने बताया कि बिना लाइसेंस कोई दवा पास रखने पर 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। लेकिन यदि दवा नकली हो तो धारा 17बी भी लगती है, जिसमें आजीवन कारावास का प्रावधान है।