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Baghpat News: विचारों से व्यक्तित्व का बोध होता है

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-ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोले विशुद्धसागर महाराज
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फोटो संख्या 4
बड़ौत। दिगम्बर जैनाचार्य विशुद्धसागर महाराज ने कहा कि सज्जन पुरुष भूलकर भी अनैतिक कार्य नहीं करते, अन्य किसी के साथ दुर्व्यवहार नहीं करते हैं। सज्जन विपत्ति के आने पर भी मर्यादा नहीं तोड़ते हैं, पर हित के लिए सज्जन हमेशा प्रयास करते हैं।
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जैनमुनि बुधवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सज्जनों से शत्रु भी प्रभावित हो जाता है। सज्जनों के विचार आत्म कल्याण के साथ-साथ प्राणी मात्र के लिए होते हैं। उनकी दृष्टि विशाल होती है। विचारों के अनुसार ही व्यक्ति का जीवन होता है। वर्तमान के विचार ही भविष्य में कार्यरूप परिणत होते हैं। विचार जीवन के दिशा-बोधक होते हैं। विचारों के अनुसार ही व्यक्ति का आचरण होता है। विचारों से ही व्यक्ति की पहचान होती है। विचारों से व्यक्ति के व्यक्तित्व का बोध होता है। साहित्य और विचार समाज के दर्पण होते हैं। श्रेष्ठ एक विचार भी जीवन को परिवर्तित कर देता है। विपरीत एक विचार भी सही-राह से भटका देता है, इसलिए व्यक्ति को विपरीत विचारों से प्रयत्न पूर्वक अपनी रक्षा करना चाहिए। संचालन पंडित श्रेयांस जैन ने किया। सभा के मध्य पंचकल्याणक महोत्सव के पात्रों ने आचार्य श्री को श्रीफल समर्पित किया। सौधर्म इंद्र राजकुमार जैन को बड़ौत दिगंबर जैन समाज समिति के अध्यक्ष प्रवीण जैन और मुख्य संयोजक अतुल जैन सर्राफ द्वारा विहर्ष सभागार में तिलक किया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने मंगल बधाई गीत गाये। शाम 7 बजे दिगंबर जैन छोटा मन्दिर में ब्रहमोतर इंद्र संदीप जैन का तिलक और मंगलगीत का कार्यक्रम संपन्न हुआ। मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि 16 सितंबर को दोपहर 1 बजे से आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ससंघ का पीछी परिवर्तन समारोह ऋषभ सभागार में धूमधाम से मनाया जाएगा।
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