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कटार सिंह की ट्यूबवेल से बूझ रही आदमपुर गांव के ग्रामीणों की प्यास

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बड़ौत। पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों की दुर्दशा देखनी है तो बिनौली ब्लाक के आदमपुर गांव में आइए। यहां लगे सरकारी हैंडपंप काफी समय से खराब है। आलम यह है कि गांव के जंगल में लगी ट्यूबवेल से पीने का पानी लाने को महिलाएं व युवतियां मजबूर है। इतना सब कुछ होते हुए भी ग्राम प्रधान, सचिव सहित व अन्य अधिकारी आंखें बंद कर बैठे हुए है। इससे ग्रामीणों में रोष है।
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आंकड़ों के अनुसार गांव की आबादी लगभग 2200 के करीब है। ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए दो-तीन साल पहले करीबन 18 हैंडपंप लगाए गए थे। मगर, कुछ दिन चलने के बाद एक के बाद एक हैंडपंप ठप हो गए। इस कारण पेयजल के लिए ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शुक्र है गांव के कटार सिंह का, जिनकी ट्यूबवेल से पूरे गांव की प्यास बूझती है। गांव के बाहर जंगल में उनकी ट्यूबवेल लगी है। हैंडपंप खराब होने के कारण गांव की महिलाएं और युवतियां वहां से पीने का पानी लाती है। कपड़े धोने जैसे अन्य कार्य ट्यूबवेल पर ही मजबूर है।
क्या कहते है ग्रामीण
बाबूराम व आकाश का कहना है कि गांव में लगे अधिकांश हैंडंपप खराब पड़े है। शिकायतों के बावजूद भी कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। गांव की महिलाएं व युवतियां गांव के ही बाहर जंगल में लगी ट्यूबवेल से पीने के पानी की व्यवस्था करती है।
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मिन्टू व अजय का कहना था कि कई बार तो बिजली में फाल्ट होने के चलते ट्यूबवेल भी नहीं चल पाता। ऐसे में पूरे गांव में पेयजल संकट गहरा जाता है। ऐसी स्थिति में पास के गांव के जंगल में लगी ट्यूबवेल से पीने का पानी लाना पड़ता है।
ग्राम सचिव की लेटलतीफी के चलते हैंडपंप के रिबोर का कार्य अधर में लटका हुआ है। एक-दो दिनों के अंदर खराब हैंडपंप को रिबोर कराने का कार्य शुरू किया जाएगा। - मनोज पंवार, ग्राम प्रधान।
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