प्राथमिक विद्यालय पट्टी चौधरान और पट्टी वाजिदपुर का मामला
मध्याह्न भोजन के बाद खुद ही धोने पड़ते है बच्चों को बर्तन
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत (बागपत)। यदि आप सोच रहे है कि आपने अपने बच्चे को स्कूल पढ़ने के लिए भेज दिया है और वह पढ़ रहा है, तो इस गलतफहमी में मत रहिए। एक बार समय निकालकर जरूर स्कूल में जाए, ताकि सच्चाई आपके सामने आ जाए। ऐसा ही एक वाक्या शनिवार को नगर के दो सरकारी स्कूल मेें देखने को मिला, जहां पर बच्चों को पढ़ाने की बजाएं उनसे शिक्षिकाएं बर्तन धुलवाती नजर आई। यह वाक्या हमारे कैमरे में कैद हो गया तो शिक्षिकाओं में भगदड़ मच गई। उधर, पूरा मामला बताने के बावजूद शिक्षा विभाग के अधिकारी जांच करने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे है।
मामला बड़ौत कोतवाली के पास स्थित प्राथमिक विद्यालय पट्टी चौधरान और ठाकुर द्वार के पास स्थित प्राथमिक विद्यालय पट्टी वाजिदपुर का है। शनिवार को प्राथमिक विद्यालय पट्टी चौधरान में अधिकांश बच्चे तकरीबन 20 मीटर दूर जाकर एक हैंडपंप पर बर्तन धोते नजर आए। हैरानी की बात तो यह है कि जब संबंध में विद्यालय की शिक्षिकाओं से पूछा गया तो वह कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने इतना जरूर कहा कि बच्चे नहीं धोएंगे तो और कौन धोएगा? उधर, बच्चों से पूछने पर पता चला कि वह रोजाना मिड-डे मील बनने के बाद बर्तन खुद ही धोते हैं। प्राथमिक विद्यालय पट्टी वाजिदपुर में पढ़ने वाले बच्चों का भी यहीं हाल है। यहां भी रोजाना बच्चों को बर्तन धोने पड़ते है।
क्या कहते है नियम
प्राथमिक विद्यालय पट्टी चौधरान में 102 छात्र-छात्राएं पंजीकृत है और यहां दो रसोइया है। प्राथमिक विद्यालय पट्टी वाजिदपुर में 80 छात्र-छात्राएं पंजीकृत है और यहां भी दो रसोइया तैनात है। नियम कहते है कि 25 बच्चों तक एक रसोइया की तैनाती होनी चाहिए। इससे ऊपर दो की तैनाती होनी चाहिए। मिड-डे मील बनाने वाली रसोइयों को सरकार की तरफ से प्रतिमाह 1500 रुपये मानदेय दिया जाता है। प्राथमिक विद्यालय पट्टी चौधरान में तीसरे रसोइया की तैनाती का प्रस्ताव भेजा गया है। नगर क्षेत्र के कार्यवाहक एबीएसए सतीश शर्मा के मुताबिक बच्चों के बर्तन धोने की जिम्मेदारी रसोइये की ही है। उसे ही बच्चे धोने चाहिए।
मामला संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा हो रहा है तो बहुत गलत है। मामले की जांच कर कार्रवाई कराई जाएगी। - सतीश शर्मा, कार्यवाहक एबीएसए, नगरीय क्षेत्र।