मैं तो लोगों के तगादों से परेशान हो गया हूं। जिंदगी अब अच्छी नहीं लग रही है। दुनिया से जा रहा हूं, बच्चों का ख्याल रखना। मरने से पहले कुछ इस तरह कहना था किसान जगत सिंह का।
मृतक किसान के भतीजे संजय ने अनौपचारिक बातचीत ने बताया बृहस्पतिवार को वह भी बैंक में गया था। उसके सामने ही चाचा जगत सिंह को बैंक मैनेजर ने अपमानित किया था। चाचा को मैनेजर ने रुपये नहीं निकालने दिए।
तभी से वे डिप्रेशन में थे। मरने से पहले उनकी चाची संतोष (मृतक की पत्नी) को चाचा जगत सिंह ने कहा था कि मैं तो लोगों के तगादों से तंग आ चुका हूं। न दिन में चैन है और न रात को आराम। दिन रात इसी की टेंशन है। गांव में निकलना भी दुश्वार हो गया है।
उसे अब जिंदगी अच्छी नहीं लगती है। वह बच्चों को तुम्हारे सहारे दुनिया से जा रहा है। चाचा जगत सिंह ने कहा था कि वह भूखमरी के कगार पर है। तभी बैंक मैनेजर ने कहा तेरे मरने से क्या जग सुना हो जाएगा। हजारों किसान पहले मर चुके हैं।
दो दिन से नहीं जल रहा था चूल्हा
संजय का कहना है कि बैंक के मैनेजर के दुर्व्यवहार से अकेले जगत सिंह ही नहीं पूरा परिवार डिप्रेशन में आ गया था। तब से अब तक उनके घर पर चूल्हा भी नहीं जला है। संजय ने बताया जगत सिंह के चार बेटे विक्रम, अनुज, मिंटू और सुमित है। सुमित की 21 अप्रैल को ही शादी हुई थी।
पहले भी कर चुके है कई किसान आत्महत्या
बागपत। कर्ज से परेशान होकर जगत सिंह के आत्महत्या करने का पहला मामला नहीं है। पहले भी दर्जनों किसान आत्महत्या कर चुके हैं। लुहारी और फैजपुर निनाना, दोघट क्षेत्र के कई किसान मौत को गले लगा चुके हैं।