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सर्वे ऑफ इंडिया ने चिन्हित किए स्थान, जल्द लगेंगे पिलर

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सर्वे ऑफ इंडिया ने चिह्नित किए स्थान, जल्द लगेंगे पिलर
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बागपत। यूपी हरियाणा के किसानों के बीच सीमा विवाद के निपटारे के लिए पिलर सर्वे का कार्य पूरा होने के बाद दोनों राज्यों के अधिकारियों की चंडीगढ़ में मीटिंग हुई। जहां पिलर गायब हो चुके हैं, अब वहां सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से चिह्नित किए स्थानों पर दोबारा पिलर लगाए जाएंगे। दोनों राज्य के अधिकारी किसानों से समन्वय रखेंगे, ताकि कानून व्यवस्था खराब होने की स्थिति न बनें।
पश्चिम यूपी के कई जिलों का हरियाणा के किसानों के साथ भूमि को लेकर विवाद है। दीक्षित अवार्ड के बाद सीमांकन के पिलर लगाए गए थे, लेकिन इनमें अधिकतर पिलर गायब हो चुके हैं। प्रशासन ने सर्वे ऑफ इंडिया के साथ मिलकर दोबारा पिलर की जांच और दोबारा स्थापना के लिए पिछले वर्ष 24 नवंबर से सर्वे का कार्य किया था। बृहस्पतिवार को चंडीगढ़ में हरियाणा के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के प्रभावित जिलों के अधिकारियों की बैठक हुई। जिले के एडीएम अमित कुमार सिंह ने बताया कि तय किया गया है कि सर्वे ऑफ इंडिया ने जिन स्थानों को चिह्नित किया है, वहां पर पिलर लगाने का कार्य किया जाएगा। जल्द ही दोनों राज्यों के अधिकारियों की मौजूदगी में पिलर लगेंगे। डीएम शकुंतला गौतम ने बताया कि जिले के किसानों का पक्ष भी रखा गया है। किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करने दिया जाएगा। दोनों राज्यों के बीच संयुक्त सर्वे का कार्य 25 नवंबर से सात दिसंबर तक हुआ था।
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विलुप्त हो गए 236 पिलर
बागपत। वर्ष 1979 में बागपत के हिस्से में 236 पिलर लगाए गए थे। वर्तमान में एक भी सीमा पिलर मौजूद नहीं है। सोनीपत और पानीपत के हिस्से में करीब 472 पिलर्स थे, इनमें भी अधिकतर गायब हो गए हैं। संयुक्त सर्वे के बाद दोबारा से पिलर लगाने का कार्य सर्वे ऑफ इंडिया करेगा।
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इन गांव की हरियाणा से सीमा विवाद
बागपत। सांकरौद, मवी कलां, मवी कलां बांगर, नंगला बहलोलपुर, काठा, पाली, बागपत खादर, खंडवारी खादर, सिसाना खादर, निवाड़ा खादर, गौरीपुर खादर, नैथला, फैजल्लापुर, फैजपुर निनाना, सुल्तानपुर हटाना, खेड़ा इस्लामपुर, खेड़ी प्रधान, अकबरपुर ठसका खादर, कोताना, जागोस, शबगा, ककौर, बदरखा, छपरौली, कुर्डी, नांगल, टांडा गांव के खादर क्षेत्र का जमीनी विवाद है।
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