फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Baghpat News: स्कूल में छत का मलबा और ईंटें गिरी, बच्चों को वापस ले गए परिजन

विज्ञापन
विज्ञापन
बागपत। शहर के ठाकुरद्वारा मोहल्ला स्थित कन्या जूनियर हाईस्कूल में बृहस्पतिवार सुबह कक्षा सात के कक्ष की छत का मलबा और ईंटें गिर गईं। प्रार्थना सभा होने के दौरान हादसा होने से कोई जनहानि नहीं हुई। मगर हादसे की सूचना पर पहुंचे अभिभावक बच्चों को अपने साथ लेकर घर चले गए। अभिभावकों ने बच्चों को जर्जर स्कूल में भेजने से इंकार कर दिया।
विज्ञापन

कन्या जूनियर हाईस्कूल में 755 बच्चों का पंजीकरण है, इनमें से बृहस्पतिवार को 457 बच्चे स्कूल आए थे। जब प्रार्थना सभा चल रही थी, तभी कक्ष की छत का मलबा व ईंट निकलकर गिर गई। तेज आवाज होने पर वहां अफरा-तफरी मच गई और शिक्षिकाएं व बच्चे कक्ष के पास गए तो वहां मलबा व ईंट पड़ी थी। यह गनीमत रही कि उस समय कक्ष में बच्चे नहीं थे, जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया। हादसा होने का पता चलने पर अभिभावक स्कूल पहुंच गए और बच्चों को साथ ले गए। स्कूल पहुंचे अभिभावक हारुन मलिक और शकीना ने कहा कि स्कूल का भवन जर्जर हो गया है। स्कूल में कोई हादसा हो गया तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। हारुन का कहना था कि भवन ठीक न होने तक वह अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।
-
34 साल पुराना भवन हो चुका जर्जर, दीवारों में दरार
नगर के ठाकुद्वारा मोहल्ले के कन्या जूनियर हाईस्कूल का भवन वर्ष 1990 में बना था। स्कूल का भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है तो उसकी दीवारों में दरार आई हुई है। स्कूल में 13 कक्ष हैं, जिनमें 12 में कक्षाएं चलती हैं तो एक कक्ष मुख्य अध्यापक व एक रसोई है। वहां सभी कक्ष जर्जर हैं, मगर कक्षा तीन और कक्षा आठ के कक्ष की हालत सबसे ज्यादा खराब है।
विज्ञापन


प्रधानाध्यापक ने कई बार लिखा विभाग को पत्र

प्रधानाध्यापक मंजू देवी ने स्कूल का भवन जर्जर होने के कारण कई बार बेसिक शिक्षा विभाग को पत्र लिखा। उनको भवन के जर्जर होने की पूरी स्थिति से अवगत कराया गया। इसके साथ ही यह कहा गया कि ऐसे में कोई हादसा हो सकता है और इसका कोई समाधान निकाला जाए। इसके बावजूद सभी अपनी जिम्मेदारियों से बचते हुए एक-दूसरे पर मामले को टालते रहे।
-
बीएसए ने कक्ष बंद करने को कहा, फिर भी बच्चों को बैठाते रहे
बीएसए गीता चौधरी ने 13 जुलाई को जिला समन्वयक निर्माण सौरभ शुक्ला के साथ विद्यालय का निरीक्षण किया था। बीएसए ने प्रधानाध्यापक को कमरे को बंद करने के निर्देश दिए थे। हालांकि बच्चों की संख्या को देखते हुए उनको यह नहीं बताया गया कि आखिर बच्चों को अन्य किस जगह बैठाया जाए। बीएसए वहां से निर्देश देकर चली गईं और इसके बावजूद बच्चों को उस कक्ष में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही थी। प्रधानाध्यापक मंजू रानी का कहना है कि स्कूल में भवन की कमी के कारण उस कक्ष में पढ़ाई कराई जा रही थी।

सीडीओ स्कूल में पहुंचकर भड़के, भवन की तलाश शुरू
सीडीओ नीरज कुमार श्रीवास्तव दोपहर बाद स्कूल में निरीक्षण करने पहुंचे। वहां की स्थिति देखकर प्रधानाध्यापक समेत अन्य को फटकार लगाई। कहा कि जब भवन जर्जर हो चुका है तो वहां बच्चों की जान जोखिम में क्यों डाली जा रही है। वहां से बच्चों को अन्य जगह पर शिफ्ट किया जा सकता था। मगर सभी ने लापरवाही दिखाई है। इस पर सीडीओ ने जल्द ही भवन की तलाश करके वहां अस्थाई रूप से कक्षाएं चलाने की बात कही है।
-भवन का निरीक्षण करने के बाद प्रधानाध्यापक को कक्ष को बंद करने के निर्देश दिए गए थे। विभाग की ओर से लोनिवि को भवन को जर्जर घोषित करने के लिए पत्र भी जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद कक्ष को खोला जा रहा था।-सौरभ शुक्ला, जिला समन्वयक निर्माण
-
विद्यालय के कमरे जर्जर होने के कारण स्कूल को दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने के लिए भवन की तलाश की जा रही है। बच्चों को दूसरे भवन में शिफ्ट करने के लिए बृहस्पतिवार को बीआरसी का भी निरीक्षण किया, मगर वहां भी बच्चे अधिक होने के कारण शिफ्ट नहीं किया जा रहा है। जल्द ही बच्चों को अन्य किसी स्कूल या फिर अन्य भवन में शिफ्ट किया जाएगा। गीता चौधरी, बीएसए
विज्ञापन

-
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें