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सर्वे का विरोध, लॉकडाउन के बाद डीएम से मिलेंगे सुल्तानपुर हटाना के ग्रामीण

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बागपत। यमुना खादर में सुल्तानपुर हटाना गांव के किसानों की जमीन का सर्वे भले ही पूरा हो गया है, लेकिन ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वह लॉकडाउन के बाद डीएम शकुंतला गौतम से मिलकर इंसाफ की मांग करेंगे।
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ग्राम प्रधान रविंद्र का कहना है कि सर्वे टीम ने गांव की पंचायती जमीन हरियाणा के किसानों को दे दी है। पैमाइश के आधार पर हरियाणा व यहां गांव के किसानों को उनकी जमीन मिलनी चाहिए थी। इस बारे में शीघ्र ही जिलाधिकारी से मिलकर गांव की पंचायती जमीन वापस कराने की मांग की जाएगी। पूरा गांव सर्वे का विरोध कर रहा है। ग्रामीण प्रकाश और धूम सिंह का कहना है कि सर्वे के दौरान अनियमितता बरती गई है। हवलदार जसबीर का कहना है कि 23 साल सर्वे होने के बाद भी गांव के किसानों को उनकी जमीन नहीं मिल पाई है। जमीन का सही सर्वे होना चाहिए। धीरेंद्र शास्त्री का कहना है कि सर्वे में ग्रामीणों की अनदेखी की गई है। हरियाणा के किसानों को फायदा दिया गया है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शीघ्र ही जिलाधिकारी से मिलकर गांव की जमीन वापस दिलवाने की मांग की जाएगी।
क्या है मामला
बागपत। जिले के सुल्तानपुर हटाना और हरियाणा के सोनीपत जिले के बड़ौली, असदपुर और नारनौद गांव के बीच यमुना खादर की जमीन पर साल 1987 से विवाद चला आ रहा है। सर्वे विभाग ने खादर में भूमि की पैमाइश का कार्य पूरा कर 147.33 हेक्टेयर की खतौनियां बना ली है। यूपी के किसान इस सर्वे का विरोध कर रहे हैं।
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