फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मिलों में नए पेराई सत्र की तैयारी, पुराने बकाए का नहीं हुआ भुगतान

विज्ञापन
विज्ञापन
- जिले की तीनों मिलों पर किसानों का 540 करोड़ से अधिक का बकाया
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। चीनी मिलों में नए पेराई सत्र की तैयारी हो गई है। दस सितंबर से जिले मे कच्चे कलेंडर वितरण करने की तैयारी है। नया सत्र शुरु होने वाला है, मगर अभी तक किसानों के पिछले बकाए का पूरा भुगतान नहीं हो पाया है। जिले की तीन मिलों पर ही किसानों का लगभग साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये बकाया है। सबसे अधिक बकाया 373 करोड़ रुपये मलकपुर चीनी मिल पर है।
जिले के जिले के एक लाख 26 हजार किसान बागपत के अलावा मुजफ्फरनगर, शामली, गाजियाबाद और हापुड़ जिले की 12 मिलों पर गन्ना सप्लाई करते है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में जिले के किसानों ने मिलों पर 278.98 लाख कुंतल गन्ने की आपूर्ति की है। इन मिलों पर किसानों का करोड़ों रुपये का बकाया शेष है। मिलों में नए पेराई सत्र की तैयारियां चल रही है, जबकि अभी तक पुराने बकाए का भुगतान नहीं हो पाया है। बागपत की तीन मिलों पर ही किसानों का 540 करोड़ रुपये बकाया है। बागपत शुगर मिल ने इस वर्ष 10179.74 लाख रुपये, रमाला मिल ने 21336.41 लाख रुपये और मलकपुर मिले ने 10460 लाख रुपये का भुगतान किया है, जबकि बागपत शुगर मिला पर 6583.83 लाख, रमाला शुगर मिल पर 10050.86 लाख रुपये और मलकपुर मिल पर 37366.76 लाख रुपये बकाया है।
विज्ञापन

भुगतान न होने से आर्थिक संकट से जूझ रहा किसान
टटीरी के किसान ऋषिपाल सिंह का कहना है कि गन्ने के बकाए का भुगतान न होने के कारण किसान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। उन्होंने बकाए का शीघ्र भुगतान कराने की मांग की है।
सिंघावली के ईश्वर सिंह का कहना है कि खाद, बीज और डीजल महंगा होने से फसल की लागत बढ़ गई है और भुगतान न होने के कारण किसानों को कर्ज लेकर खेती करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने शीघ्र भुगतान कराने की मांग की है।
गाधी गांव के दीपक शर्मा का कहना है कि नया पेराई सत्र शुरु होने वाला है और अभी तक पुराने पेराई सत्र का भुगतान नहीं किया गया है। भुगतान न होने के कारण किसानों को परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।
विज्ञापन

बसोद के किसान मोहम्मद हनीफ का कहना है कि समय पर भुगतान न होने के कारण किसान कर्ज के तले दब रहा है। किसान फसल की बुआई और बीज, खाद और कीटनाशक खरीदने के लिए कर्ज लेने के लिए मजबूर है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें