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किसानों के नाम पर एकजुट विपक्ष का पंचायत चुनाव में बिखरा कुनबा

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बागपत। किसान आंदोलन ने गैर भाजपाई राजनीतिक दलों की महत्वाकांक्षा बढ़ा दी है। किसानों के मुद्दे पर एक साथ मंच साझा करने वाले दलों में जिला पंचायत चुनाव आते ही दूरियां बढ़ गई हैं। अपने आप को मजबूत मानते हुए कोई एक दूसरे के लिए सीट छोड़ने को तैयार नहीं है। सपा और रालोद ने भी जिला पंचायत सदस्य पद कई वार्डों में एक दूसरे के सामने प्रत्याशी उतार दिए हैं।
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विधान सभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल माने जा रहे पंचायत चुनाव से पहले किसान आंदोलन को लेकर विरोधी दलों ने भाजपा को खूब घेरा था। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान चौपाल लगाकर कृषि कानून को विरोधी बताया और सरकार को चुनाव में मात देने की रणनीति तैयार की। इस मुद्दे पर हुई रालोद की महापंचायत में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साथ मंच भी साझा किया। ऐसे संकेत दिए गए थे कि पंचायत चुनाव भी यह दोनों दल मिलकर लड़ेंगे। कुछ जगह पर ऐसा भी हुआ है। मगर, सीट बंटवारे का समय आया तो सारे समीकरण उलझ गए। सभी दल किसान आंदोलन के जरिए अपनी स्थिति पहले से मजबूत मानने लगे हैं। ऐसे माहौल में दूसरे दलों के लिए अधिक सीट छोड़ने को कोई पार्टी राजी ही नहीं हुआ। एक-दूसरे के साथ मिलकर भाजपा को शिकस्त देने की रणनीति बनाने वाले अब खुद चुनावी मैदान में आमने-सामने आ गए हैं।
जिला पंचायत के इन वार्डों में सपा और रालोद आमने-सामने
रालोद की ओर से जारी की गई सूची में 16 प्रत्याशियों की घोषणा की गई थी। सपा की ओर से 14 प्रत्याशी मैदान में उतारे गए थे। वार्ड संख्या-एक, दो, तीन, चार, पांच, छह, आठ, दस, 11, 14, 16 में दोनों पार्टियों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। यानि जिला पंचायत के कुल 20 वार्डों में से 11 वार्डों में दोनाें पार्टियों के प्रत्याशी आमने सामने है।
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कांग्रेस ने इन वार्डों में उतारे अपने प्रत्याशी
कांग्रेस की ओर से दस प्रत्याशियों की सूची जारी की गई थी। साथ ही दावा किया गया था कि अन्य सीटों पर भी पार्टी जल्द अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर देगी। कांग्रेस ने वार्ड-चार, छह, सात, नौ, दस, 11, 13, 14, 16 और 20 में अपने प्रत्याशी के नामों की घोषणा की थी।
आम आदमी पार्टी ने दस सीटों पर दावेदार उतारे
आम आदमी पार्टी की ओर से दस सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए गए। वार्ड-एक, दो, छह, सात, आठ, दस, 12, 16, 19 व 20 से प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की गई है। जबकि वार्ड-14 से रालोद प्रत्याशी रामपाल को समर्थन देने की घोषणा की।
पंचायत चुनाव छोटे स्तर पर लड़े जाते हैं। इसमें स्थानीय स्तर के मुद्दे ज्यादा अहम होते हैं। गठबंधन से ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता। हमारी पार्टी किसान आंदोलन के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। दूसरी पार्टियों से कुछ क्षेत्रों में समझौता शायद हुआ है। बागपत में हमने सभी 20 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। - डॉ. जगपाल सिंह तेवतिया, रालोद जिलाध्यक्ष।
पंचायत चुनाव में स्थानीय स्तर के कार्यकर्ता मैदान में उतरते हैं। दूसरे दलों से गठबंधन होने पर सीट कम हो जाएंगी और पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष फैल सकता था। इसी लिहाज से पार्टी ने निर्णय लिया था कि जो भी कार्यकर्ता चुनाव लड़ना चाहता है, वह लड़ सकता है। - मनोज चौधरी, सपा जिलाध्यक्ष।
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