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श्रीमद्भागवत महापुराण कथा सुनने से मिलता है आनंद : नीरज शर्मा

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-कथा वाचिका ने भक्त प्रहलाद के जीवन और चरित्र का वर्णन किया
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फोटो 4
संवाद न्यूज एजेंसी
दोघट। मौजिजाबाद नांगल गांव के श्री शिव गोरखनाथ मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा महापुराण में चौथे दिन भक्त प्रहलाद के जीवन और चरित्र का वर्णन किया गया। कथा वाचिका नीरज शर्मा ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का केंद्र आनंद है। भागवत कथा एक ऐसा अमृत है, जिसका जितना भी पान किया जाए मन तृप्त नहीं होता है।
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कथा वाचिका ने कहा कि यदि भक्त सच्चा हो तो विपरीत परिस्थितियां भी उसे भगवान की भक्ति से विमुख नहीं कर सकती। भयानक राक्षस प्रवृत्ति के हिरण्यकश्यप जैसे पिता को प्राप्त करने के बावजूद भी प्रहलाद ने अपनी ईश्वर भक्ति नहीं छोड़ी। भक्त प्रहलाद ने अपने पुत्र होने का दायित्व भी निभाया। उन्होंने कहा कि पुत्र का यह सर्वोपरि दायित्व है कि यदि उसका पिता कुमार्गगामी और दुष्ट प्रवृत्ति का हो तो उसे भी सुमार्ग पर लाने के लिए सदैव प्रयास करने चाहिएं। प्रहलाद ने बिना भय के अपने पिता हिरण्यकश्यप के यहां रहते हुए ईश्वर की सत्ता को स्वीकार किया और पिता को भी उसकी ओर आने के लिए प्रेरित किया। मगर राक्षस प्रवृत्ति का होने के चलते हिरण्यकश्यप प्रहलाद की बात को नहीं मानता था। ऐसे में भगवान नरसिंह ने उसका संहार किया। इसके बाद भी प्रहलाद ने अपने पुत्र धर्म का निर्वहन किया और अपने पिता की सद्गति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
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