प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत मकान बनवाने को अधिकारियों के चक्कर काटकर थक चुके हैं लोग
मुख्यमंत्री पोर्टल पर किस्त नहीं मिलने की शिकायत करने पर मकान पक्का होने ी फर्जी रिपोर्ट भेज रहे अधिकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण से गरीब परिवारों को अपने मकान की उम्मीद जरूर जगी थी, लेकिन अफसरों की लापरवाही इन गरीब परिवारों पर भारी पड़ रही है। हालात यह है कि किसी की फर्जी रिपोर्ट तैयार करके भेज दी गई तो किसी की चार साल में एक भी किस्त नहीं मिली। परिवारों को सिर ढ़कने तक के लिए जगह नहीं है। किसी ने छप्पर का सहारा लिया हुआ है तो कोई टूटे कच्चे मकान में रह रहा है। अधिकारियों के चक्कर काटकर थक गए परंतु समस्या जस की तस है।
अधिकारी ने मकान पक्का बताकर रिपोर्ट भेजी
केस एक
सिंघावली अहीर के यामीन अंसारी पुत्र रशीद का दो कमरों का कच्चा मकान था। उनमें पत्नी, पुत्रवधू व दो पोते रहते हैं। मकान बरसात में गिर गया था। उसके परिवार के पास सिर छिपाने के लिए छत नहीं है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। परिवार में कोई भी कमाने वाला नहीं है। उनके दोनों पोते मजदूरी करके घर का खर्च चला रहे हैं। उसने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत मकान बनवाने के लिए जनसुनवाई पोर्टल पर प्रार्थना पत्र भेजा था। उसकी जांच रिपोर्ट में भेज दिया कि मकान में ईंट लगी हुई हैं, जबकि मकान कच्चा है। इस तरह से अधिकारियों की लापरवाही से गरीबों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
चार साल से छप्पर में कट रही जिंदगी
केस दो
गौरीपुर जवाहरनगर नई बस्ती निवासी शम्मी पत्नी सादा के परिवार में नौ सदस्य हैं। पति सादा मजदूरी करके परिवार का गुजारा कर रहा है। शम्मी ने बताया कि चार साल पहले प्रधान व सचिव मकान बनवाने के लिए फार्म भरवाकर ले गए थे। आज तक मकान नहीं बना है और छप्पर में रहना पड़ रहा है। कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे परंतु कुछ नहीं हो रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में कई साल पहले आवेदन करने के बाद भी यदि किस्त नहीं मिली है तो परियोजना निदेशक से जानकारी की जाएगी। यदि कोई समस्या है तो उसे दूर कराया जाएगा। यदि कोई पात्र है तो उसकी किस्त नहीं रुकनी चाहिए।-रंजीत सिंह, मुख्य विकास अधिकारी