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श्रीजी की पूजा-अर्चना कर अर्घ्य चढ़ाए

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बागपत के दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में भगवान श्री 1008 पारस नाथ के अभिषेक करते श्रद्घालु - फोटो : BAGHPAT
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बागपत/अग्रवाल मंडी टटीरी/अमीनगर सराय। दशलक्षण पर्व के सातवें दिन जैन मंदिरों में श्रद्धालुओं ने श्रीजी की पूजा-अर्चना कर अर्घ्य चढ़ाए। इसके उपरांत उत्तम तप धर्म की पूजा हुई। जैन आचार्यों ने धर्म सभा में उत्तम तप धर्म पर प्रकाश डाला।
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श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में भगवान श्री पारसनाथ की प्रतिमा को मंदिर प्रांगण में पांडुक शिला पर विराजमान कर विधान किया गया। प्रवीण जैन, कपिल जैन, ललित जैन, राजेश जैन, नमन जैन ने शांतिधारा कराई। इसके उपरांत उत्तम तप धर्म की पूजा हुई। 64 अर्घ्य समर्पित किए। मयंक जैन ने कहा कि व्यक्ति को जिनवाणी का स्वाध्याय और पाठ करना चाहिए। संध्या में सर्व प्रथम 48 दिवसीय भक्तांबर स्त्रोत का पाठ कर महाआरती की गई। इसके उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतियोगिता कराकर विजेताओं जैन सेवा संघ की ओर से पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में पीयूष जैन, पंकज जैन, मुन्ना जैन, अतुल जैन, संजीव जैन, विनीत जैन, सार्थक जैन, ऋषभ जैन, यश जैन, तरुण जैन, विकास जैन, कमल, अनमोल, कामिनी जैन, सुषमा जैन, सुशीला जैन, पालकी जैन, बबीता जैन सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
अग्रवाल मंडी टटीरी के श्री दिगंबर जैन मंदिर में सिद्धचक्र विधान पाठ में श्रद्धालुओं ने श्रीजी को 128 अर्घ्य चढ़ाए। पंडित ऋषभ जैन ने कहा कि आत्म शुद्धि का मार्ग तप है। पाठ में प्रवीण जैन, संजय जैन, मुकेश जैन, हर्ष जैन, जिनेंद्र जैन, गीता, सुधा, माया, अंजलि, प्रमिला, रेनू मौजूद रही। अमीनगर सराय के पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में उत्तम तप धर्म की आराधना की गई। शिवम शास्त्री ने कहा कि भगवान की सच्ची भक्ति से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव होती है। राजेश जैन, अरुण जैन, पारस जैन, सुधारस जैन, जयकुमार जैन, अंकुर जैन, अंकित जैन, अनवी जैन, रितिका जैन मौजूद रही।
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