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अब चुनावों में पहले वाली बात नहीं, पहले पंचायतों में हो जाता था निर्णय

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अग्रवाल मंडी टटीरी/छपरौली/रमाला। मीतली निवासी ओमप्रकाश 65 वर्षीय का कहना है कि पहले गांवों में चुनाव बड़े बुजुर्गों के कहने पर ही ग्रामीण वोट दे देते थे। तब न झगड़ा-फसाद होता था और न रंजिश होती थी। आज पहले की अपेक्षा चुनाव में लाखों रुपये खर्च होने लगे हैं। शराब भी खूब बांटी जाती है। बड़ों की कोई बात नहीं मानता। शराब पीकर फिर झगड़े-फसाद होते हैं।
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डौला निवासी वीरेंद्र उर्फ मुनीम जी का कहना है पहले घर परिवार के बड़े आदमी के कहने पर परिवार वाले वोट दे देते थे। गांव में बुजुर्गों की पंचायत होती थी। पंचायत में जो निर्णय लेते थे, सभी ग्रामीण मान लेते थे। लेकिन आज कोई किसी की बात नहीं मानता यहां तक कि घर परिवार में भी बात नहीं मानते। शराब आदि ने चुनाव को काफी महंगा कर दिया है।
आदर्श नंगला के पूर्व प्रधान करण सिंह ने बताया कि पहले जमाने में ग्राम प्रधान का चुनाव करते समय सभी ग्रामीण एक पंचायत का आयोजन करते थे। पंचायत ही किसी व्यक्ति को प्रधान की जिम्मेदारी दी जाती थी। वाद-विवाद वाली कोई भी बात नहीं होती थी। जिसको ग्रामीण तय कर देते हैं, उसी को प्रधान बनाया जाता था। लेकिन अब स्थिति बिल्कुल विपरीत है। सर्वसम्मति से प्रधान चुना जाना दुर्लभ कार्य हो गया है।
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रमाला निवासी महक सिंह ने बताया कि अब प्रत्येक गांव में प्रधान पद के प्रत्याशी अनेक होते हैं। सभी अपने अपने वादे की घोषणा करते हैं और वह जीतने के बाद सब भूल जाते हैं। आजकल का चुनाव विकास कार्य को लेकर नहीं स्टेटस सिंबल पर लड़ा जा रहा है।
कंडेरा निवासी धर्मवीर सिंह ने बताया कि अब से 50 साल पहले हाथ उठाकर चुनाव कराया जाता था। तब कोई विरोध नहीं करता था। अब सब कुछ बदल गया है। चुनावों में पहले जैसी बात नहीं रही।
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