बड़ौत विधानसभा सीट
- बड़ौत विधानसभा के मतदाताओं का मिजाज भांपना राजनीतिक पार्टियों के लिए टेढ़ी खीर
- बड़ौत विधानसभा सीट समाप्त होने के बाद वर्ष 2008 में दोबारा से अस्तित्व में आई
- वर्ष 2012 में बसपा के सिर ताज सजा तो 2017 में मतदाताओं ने कमल खिलाया
अंकित चौहान
बड़ौत। छपरौली और बागपत सीट पर भले ही पार्टियों और परिवारों का कब्जा रहा हो, लेकिन बड़ौत के मतदाता इससे दूर ही रहे। इस सीट पर पहले कभी कम्यूनिस्ट पार्टी तो कभी कांग्रेस के विधायक चुने गए। दस साल से यहां के मतदाताओं का लगातार मूड बदल रहा है। वर्ष 2012 में बसपा के लोकेश दीक्षित को विधायक बनाया तो वर्ष 2017 में भाजपा का कमल खिलाते हुए केपी मलिक के सिर पर विधायकी का ताज रखा। खास बात यह है कि इस सीट पर हर विधानसभा चुनाव में विजेता का चेहरा बदल गया।
निर्वाचन क्षेत्र भंग हुआ, फिर 34 साल बाद दोबारा बनाया
बड़ौत विधानसभा सीट से वर्ष 1952 में पहली बार कांग्रेस से उमादत्त शर्मा विधायक बने थे। वर्ष 1969 तक इस सीट पर चुनाव हुए। इसके बाद चुनाव आयोग ने परिसीमन करते हुए इस निर्वाचन क्षेत्र को भंग कर दिया था। बड़ौत विधानसभा सीट दोबारा से वर्ष 2008 में अस्तित्व में आई और वर्ष 2012 में चुनाव हुआ तो बसपा के टिकट पर लोकेश दीक्षित विधायक बने। वर्ष 2017 में यहां से भाजपा का कमल खिला और केपी मलिक के सिर जीत का सेहरा बंधा।
इस बार भी चुनाव में कड़ी टक्कर रहेगी
बड़ौत विधानसभा सीट से भाजपा ने मौजूदा विधायक केपी मलिक को प्रत्याशी बनाया है। बसपा ने ब्राह्मण अंकित शर्मा और आप ने सुधीर शर्मा को प्रत्याशी बनाया है। रालोद-सपा गठबंधन से जाट को टिकट दिए जाने की बात कही जा रही है। जातीय समीकरण को देखते हुए बड़ौत सीट पर कड़ी टक्कर होती दिख रही है।
बिना खर्च चुनाव लड़ लेते थे प्रत्याशी
बड़ौत के रहने वाले 82 वर्षीय जगवीर तोमर बताते है कि पहले प्रत्याशी बिना खर्च के चुनाव लड़ लेते थे। जनता खुद ईमानदार प्रत्याशी को चंदा एकत्रित कर चुनाव लड़ाती थी, लेकिन अब का दौर अलग है। आज चुनाव में काफी खर्च करना पड़ता है। बड़ौत के 85 वर्षीय जगमेहर सिंह कहते है कि मतदाता पहले मतदान के लिए ज्यादा सजग नहीं थे और हुक्के पर बैठकर ही वोट डालने का फैसला करते थे। आज के वोटर शिक्षित है और अपने मतदान को लेकर काफी सजग है।
वर्ष विधायक पार्टी
1952-57 उमादत्त शमा कांग्रेस
1957-62 आचार्य दीपांकर कम्यूनिस्ट पार्टी
1962-67 मूलचंद शास्त्री कांग्रेस
1967 आचार्य दीपांकर कम्यूनिस्ट पार्टी (1968 में इनका निधन हो गया)
1969 विक्रम सिंह कांग्रेस (इसके बाद निर्वाचन क्षेत्र भंग हुआ)
2008 में दोबारा निर्वाचन क्षेत्र बना
2012-17 लोकेश दीक्षित बसपा
2017 केपी मलिक भाजपा
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बड़ौत में मतदाता
महिला 134998
पुरुष 165804
अन्य 13
कुल 300815
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जातिगत आंकड़े
जाति मतदाता
जाट 80 हजार
मुस्लिम 45 हजार
कश्यप 30 हजार
दलित 25 हजार
वैश्य 20 हजार
गुर्जर 18 हजार
राजपूत 12 हजार
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मतदान केंद्र
मतदेय स्थल 328
केंद्र 154