सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के दौरान पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
44 संपत्तियों पर कार्रवाई का मामला
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आवास एवं विकास परिषद ने आठ अप्रैल को 44 संपत्तियां सील की थीं। परिषद की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि ये संपत्तियां आवासीय हैं और इनमें पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
इसके बाद 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने सभी 44 संपत्तियों को ध्वस्त करने के आदेश दिए। इसके बाद परिषद ने संपत्तियों की सील खोलकर सर्वे किया और संपत्ति स्वामियों को 15 दिन में इन्हें ध्वस्त करने के नोटिस जारी किए।
सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के दौरान रोती हुई महिला
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16 सितंबर को छह निर्माणों पर हुई कार्रवाई
परिषद ने 16 सितंबर को भारी पुलिस फोर्स के साथ छह निर्माणों पर कार्रवाई की। बताया गया कि इन छह निर्माणों के आवासीय मानचित्र भी नहीं थे। आवंटियों ने इन निर्माणों में किए गए अनधिकृत निर्माण को भी नहीं हटाया था।
सोमवार को दाखिल होगी अनुपालन रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को होने वाली सुनवाई में आवास एवं विकास परिषद को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी है। इसके लिए परिषद के अधिकारी और अभियंता दिल्ली में डेरा जमाए हुए हैं। रविवार को अवकाश के बावजूद परिषद का कार्यालय खुला रहा। मेरठ कार्यालय से अधिकारियों ने तमाम कागजात भी मंगाए।
मेरठ सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के दौरान फफक पड़ी महिला
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171वें दिन भी जारी रहा महिलाओं का धरना
सेंट्रल मार्केट प्रकरण को लेकर सेक्टर-2 में महिलाओं का धरना रविवार को 171वें दिन भी जारी रहा। धरना दे रहीं शीतल पुजानी, राधा गुप्ता, जगरोशनी, रजनी, ऊषा आदि का कहना है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर घरों को तोड़ने के लिए बुलडोजर नहीं आने देंगे।
मेरठ सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के दौरान रोती हुई महिला
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मुख्यमंत्री से मिलने को लेकर भी अलग-अलग राय
मेरठ बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष और जगदम्बा अस्पताल के मालिक रविंद्र गुर्जर ने कहा कि जो व्यापारी मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांग रहे हैं, वह सही नहीं है। वहीं कुछ व्यापारियों ने सोमवार को मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात के लिए समय मांगा है।