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Baghpat News: सचिवालयों पर लटके ताले, सचिवों को ढूंढ रही आंखें

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बागपत। लोगों को अधिकारियों के पास चक्कर नहीं काटने पड़ें और उनके अधिकतर कार्य गांवों में बनाए गए सचिवालयों में सचिवों व पंचायत सहायकों के माध्यम से हो सकें। इसके लिए गांवों में सचिवालय जरूर बनाए गए, लेकिन सचिवालयों पर ताला लटका रहता है और ग्रामीणों को जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने समेत अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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ताला खुलने का इंतजार कर रहे विनयपुर के ग्रामीण
विनयपुर गांव के सचिवालय पर बृहस्पतिवार को ताला लटका हुआ मिला। जहां ग्रामीणों ने लंबे समय बाद कभी-कभी सचिवालय का ताला खुलने की बात कही। ग्रामीणों ने बताया कि सचिवालय पर लटका ताला खुलने के लिए कई दिन तक इंतजार करना पड़ता है। काम कराने के लिए ग्रामीणों को खेकड़ा तहसील की दौड़ लगानी पड़ रही है।

सचिवालय पर ताला लगाकर खोलना भूल गए
बराल गांव के ग्रामीणों ने बताया कि जन्म प्रमाण पत्र या फिर मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जब भी सचिवालय जाते हैं तो वहां ताला लटका मिलता है। उन्होंने बताया कि अब तो ऐसा लगने लगा है कि गांव में तैनात पंचायत सचिव ताला खोलना भूल गए। जो गांव में आते हैं तो गांव में इधर उधर बैठकर वापस चले जाते हैंं, जबकि ग्रामीण सचिवालय पर चक्कर लगाते रहते हैं।
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दो-तीन महीने में खुलता है गढ़ी कलंजरी का सचिवालय
गढ़ी कलंजरी गांव केे सचिवालय पर बृहस्पतिवार को ताला लटका मिला। जहां ग्रामीण विपिन कुमार ने बताया कि गांव में सचिवालय का निर्माण कराया गया था, लेकिन उसमें अधिकारी नहीं बैठते। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले दो तीन महीने बाद गांव के सचिवालय का ताला खुला था, उसके बाद से अब फिर ताला लटका हुआ है।
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प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भटक रहे बामनौली के ग्रामीण
बामनौली गांव के सचिवालय पर अधिकांश दिन ताला लटका होने और सचिव के गांव में नहीं आने के कारण ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। इस कारण ग्रामीणों को जन्म-मृत्यु से लेकर अन्य प्रमाण पत्र बनवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण रामकुशल ने बताया कि सचिव जब भी गांव आते हैं तो प्रधान के घर ही काम कर वापस लौट जाते हैं।

इन सचिवालयों पर भी लटका मिला ताला
जिले के माखर, सिंगौली तगा, अमीपुर बालैनी, सरफाबाद, हसनपुर जिवानी, बिजरौल, किशनपुर, बामनौली, बसी, गलहेता, गौरीपुर जवाहरनगर, बाखरपुर बालैनी समेत कई गांवों में बृहस्पतिवार को ताला लटका हुआ मिला।

ग्रामीणों की जुबानी
-ग्राम पंचायत सचिव कभी-कभी गांव में आते हैं, जब भी ग्रामीणों को सचिवालय में कोई काम होता है तो फोन पर संपर्क करना पड़ता है। इसके बाद ग्रामीणों को सचिव के गांव में आने का इंतजार करना पड़ता है। ओम शर्मा, पूरनपुर
-गांव में बने सचिवालय की देखरेख भी सही नहीं हो रही, जहां जानवरों का बसेरा हो गया है। ग्रामीण जब भी सचिवालय जाते हैं तो वहां ताला लटका मिलता है। सप्ताह में दो दिन सचिवों के गांव में आने का समय निर्धारित किया जाए। अतर सिंह, विनयपुर
-सचिवालय ज्यादातर बंद ही रहता है। जब भी ग्रामीणों को जन्म प्रमाण पत्र या फिर अन्य काम होता है तो उन्हें खेकड़ा ब्लॉक जाना पड़ता है। वहीं पर सचिव से काम कराये जाते हैं। शशि देवी, सिंगोली तगा।
-सचिवालय में शासन से सुविधा बढ़ाने पर जोर है, लेकिन गांव में इसका पालन नहीं हो रहा। जिस कारण ग्रामीणों को कई काम ऑनलाइन सेंटर पर जाकर कराने पड़ते हैं। सचिवालय पर सचिवों की बैठने की व्यवस्था कराई जाए। कृपाल सिंह।

वर्जन-
ग्राम पंचायत सचिवों के सचिवालयों में बैठने का रोस्टर मांगा गया है। सचिवालयों में नहीं बैठने वाले ग्राम पंचायत सचिवों और ग्राम विकास अधिकारियों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। नीरज कुमार श्रीवास्तव, सीडीओ।
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