बड़ौत। आचार्य समत्व सागर महाराज ने कहा कि जैन एक जाति न होकर एक सिद्धांत है। पूरे विश्व में जैन धर्म की एक अलग पहचान है इसका कारण है जैन धर्म के सिद्धांत। जैन धर्म बहुत ही वैज्ञानिक धर्म है। भगवान महावीर ने जो संदेश दिए हैं आज पूरा विश्व उन्हें स्वीकार कर रहा है। जियो और जीने दो।
यमत्व महाराज रविवार को श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर कैनाल रोड पर धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हमें कोई हक नहीं है कि हम किसी निरीह प्राणी का वध करें और उसके मांस का सेवन करें। प्रकृति ने हमें खाने के लिए फल सब्जियां आदि अनमोल खजाना दिया है, उसके बावजूद हमने अपने पेट को एक कब्रिस्तान बना लिया है। इसमें बस अनाप-शनाप का सामान डालते जा रहे हैं। क्या जो व्यक्ति शाकाहार अपनाते हैं, वह मांसाहारियों की तुलना में कमजोर होते हैं नहीं, लेकिन कुछ लोगों ने और कुछ लेखकों ने ऐसी भ्रांति फैजा दी है कि व्यक्ति को प्रोटीन और विटामिन मीट से प्राप्त होते हैं, जो कि तथ्यहीन हैं।
सदैव शाकाहारी भोजन करके ही हम अपने मन को और तन को स्वस्थ रख सकते हैं। अनेक बीमारियों से बच सकते हैं। कहीं भी यदि हम इंटरनेशनल फ्लाइट में भी जाते हैं तो आज शुद्ध सात्विक भोजन जैन फूड के नाम से हम वहां पर प्राप्त कर सकते हैं। युवाओं को शराब मांसाहार धूम्रपान से दूर रहना है और भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलकर अपने मानव जीवन को सफल बनाना है।
सभा में मुनि अनुपम सागर जी महाराज ने भी मंगल प्रवचन दिया। सभा का संचालन विनोद जैन एडवोकेट और डॉक्टर श्रेयांस जैन ने किया। सभा में नवीन जैन बब्बल, सुरेंद्र जैन, अनिल जैन, शरद जैन, वरदान जैन, विवेक जैन, पीयूष जैन, संकल्प जैन, सौरभ जैन, रोहित जैन, सुनील जैन आदि उपस्थित रहे।