बोले, फैसले पर पुनर्विचार कर इसे 16 साल किया जाएं
महिला शिक्षाविदों ने केंद्र सरकार के फैसले की सराहना की
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत (बागपत)। लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 कर करने के केंद्र सरकार के फैसले पर खाप पंचायतों ने असहमती जताई है। खाप चौधरी और थांबेदारों का कहना है कि सरकार का यह निर्णय बहुत गलत है। इससे सदियों से चली आ रही परंपराओं में गिरावट आएगी। कहना है कि फैसले पर पुनर्विचार कर इसे 16 साल किया जाए। उधर, महिलाओं और युवतियों ने इस फैसले की सराहना की है।
थांबेदार पट्टी मेहर चौधरी ब्रजपाल सिंह ने सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए पुनर्विचार करने की बात कही है। कहना है कि 18 से 21 नहीं बल्कि लड़कियों की शादी की उम्र 18 से 16 होनी चाहिए। जितनी ज्यादा उम्र बढ़ेगी उतने अपराध बढ़ेंगे। कहा कि आज बेटियां जींस, टॉप अन्य पहनावे के चक्कर में अपनी संस्कृति भूलती जा रही है। लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने के बजाय जींस पर पाबंदी लगानी चाहिए। लड़कियों को शालीन कपड़े पहनने चाहिए।
देशखाप चौधरी सुरेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार के इस निर्णय से सदियों से चली आ रही परंपराओं में गिरावट आएगी। कहा की शुभ कार्य समय पर ही अच्छे लगते हैं। किसी भी शुभ कार्य में देरी अशुभ माना जाता है। एक सभ्य परिवार की जिम्मेदारी होती है कि वह बेटियों को अच्छी तरह पढ़ाएं और समय पर उनका ब्याह करें।
कम उम्र में शादी करना बेटियों के साथ अन्याय
जैन स्थानवासी गर्ल्स डिग्री कॉलेज की प्राचार्या डॉ. अनीता जैन और प्रोफेसर डॉ. प्रवित्रा खत्री ने सरकार के इस निर्णय की जमकर सराहना की। कहा कि आज का युग बेटियों का युग है। पढ़ाई, खेलकूद के अलावा हर क्षेत्र में बेटियां लड़कों की बराबरी कर रही है। अच्छी तालीम लेने में समय लग जाता है। बेटियों की कम उम्र में शादी करना उनके साथ अन्याय है। कम उम्र में शादी करने पर बेटियां परिपक्व नहीं हो पाती, इसलिए बेटियों को भरपूर मौका देना चाहिए। तभी बेटियां आगे बढ़ सकेगी।
छात्रा रिया तोमर और रिया मलिक का कहना है कि सरकार का यह निर्णय बेटियों के हक में है। इससे बेटियों को फायदा मिलेगा। वे अच्छी तरह पढ़ सकेगी। कम उम्र में शादी करने के कारण बेटियों के बहुत से अरमान अधूरे रह जाते है। बेटियों को अच्छी तरह से पढ़ाना-लिखना अभिभावकों की जिम्मेदारी है।
थांबेदार ब्रजपाल सिंह- फोटो : BARAUT