बालैनी के पुरा महादेव मंदिर में आयोजित राष्ट्रीय विप्र विद्वत् परिषद् की राष्ट्रीय कार्यकारिण?
- फोटो : BAGHPAT
राष्ट्रीय विप्र विद्वत परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हुई
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। राष्ट्रीय विप्र विद्वत परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और प्रदेश कार्यकारिणी की पुरा महादेव में बैठक हुई। राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित जयभगवान शर्मा ने संगठन को मजबूत करने के लिए अधिक से अधिक संख्या में वास्तु, ज्योतिष, कर्मकांड के विशेषज्ञ को संगठन में जोड़ने का आह्वान किया। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पंडित राजकुमार शास्त्री ने कहा कि समाज के उत्थान के लिए आपसी सहयोग और संगठित रहने की जरूरत है।
बैठक में सर्वप्रथम शामली से आए राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य पंडित प्रेम किशोर कोठारी ज्योतिषाचार्य और पंडित सुरेश वेदपाठी ने दीप प्रज्ज्वलन कर आदि शंकराचार्य की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष आचार्य उमेश कौशिक ने कहा कि जिस व्यक्ति में परिश्रम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम छह गुण है, वह सदैव प्रगति करता है। ऐसे व्यक्ति की देवता भी सहायता करते हैं। राष्ट्रीय प्रचार मंत्री अनुज व्यास ने कहा कि संगठन में शक्ति होती है। उन्होंने संगठित रहकर और परोपकार की भावना से कार्य करने का आह्वान किया। राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य पंडित प्रेम किशोर कोठारी ज्योतिषाचार्य ने कहा कि लोग पारंपरिक सदाचार और शिष्टाचार को भूलते जा रहे हैं। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सतीश भारद्वाज ने कहा कि प्रजातांत्रिक परिवेश में दृढ़ता पूर्वक संगठित होकर अपने विकास के साथ राष्ट्र की चेतना को दिशा प्रदान करना होगी। उत्तराखंड प्रभारी और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य पंडित मनोज जोशी ने संगठन के विस्तार और उद्देश्यों पर बल दिया गया। बैठक में तिथि व्रत और पर्व के विषय में विवाद न हो, इसके लिए पत्रिका छपवाने का निर्णय लिया गया। कार्यकारिणी के सदस्यों ने भगवान शंकर का रुद्राभिषेक कर विश्व कल्याण की। इस अवसर पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य पंडित सुधीर शास्त्री, बागपत जिलाध्यक्ष पंडित सोमदत्त शास्त्री, शामली जिलाध्यक्ष प्रदीप शास्त्री, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य पंडित दयाराम शास्त्री, महेश शर्मा, संदीप शास्त्री, विजेंद्र शास्त्री, सुभाष शास्त्री, विपिन शास्त्री व पवन पांडे मौजूद रहे। बैठक की अध्यक्षता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित जय भगवान शर्मा और संचालन राष्ट्रीय महामंत्री आचार्य प्रवीण पुलस्त्य ने किया।