फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैसे बचेगी गौरैया, नहीं चलाए जाते अभियान

विज्ञापन
बड़ौत में एक मकान के आंगन में दाना चुगती गौरेया। - फोटो : BARAUT
विज्ञापन
विश्व गौरैया दिवस
विज्ञापन

दो साल पहले वन विभाग ने बांटे थे घोंसले और चलाया था जागरूकता अभियान
इस बार भी नहीं चलाए गए जागरूकता अभियान, लोग भी नहीं दिखते गंभीर
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। बदलते समय के साथ अब आंगन में चिड़िया की चहचाहट भी सुनाई नहीं देती। शहर कंक्रीट के जंगल में बदल गए हैं, अब घरों में चिड़ियों के घोंसलों के लिए जगह नहीं बची। इसके लिए सरकारी विभाग की अनदेखी भी जिम्मेदार है और हम भी जीव जंतुओं के संरक्षण के लिए गंभीर दिखाई नहीं देते। हालात ऐसे है कि दो साल तक वन विभाग ने घोंसला बांटकर लोगों को जागरूक किया था, मगर इस बार अभियान तक नहीं चलाया गया।
दो दशक पहले तक बड़ी संख्या में घर-घर और आंगन में दिखाई देने वाली गौरैया अब गायब होने लगी है। कच्चे घरों या लकड़ी और ईंटों की छत वाले घरों में गौरैया अपने ठिकाने बना लेती थी। लेकिन जैसे-जैसे घर पक्के होते गए, वैसे ही गौरैया भी गायब होने लगी। ग्रामीण क्षेत्रों में तो यह अभी भी दिखाई दे जाती है, लेकिन शहरी क्षेत्राें में विलुप्त सी हो गई है। इनके संरक्षण के लिए जिम्मेदार वन विभाग की स्थिति ऐसी है कि दो साल से कोई जागरूकता अभियान ही नहीं चलाया गया है। दो साल पहले गौरैया बचाने के लिए अभियान चलाया था। जिले में घोंसले बांटे गए थे, मगर इस साल कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा है।
विज्ञापन

लोगों को किया जाएगा जागरूक
वन अधिकारी कल्याण सिंह का कहना है कि दो वर्ष तक जिले में गौरैया बचाने के लिए घोंसले बांटे गए थे। अब विभागीय स्तर से अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा। लोगों को चिड़ियाओं के लिए घरों में घोंसला की व्यवस्था करने और छतों व दालानों में दाना-पानी रखने के लिए भी के लिए प्रेरित किया जाएगा।
विज्ञापन

गौरैया संरक्षण में जुटा दंपती, स्कूलों में लगवा रहे घोंसले
बड़ौत। नगर निवासी अधिवक्ता प्रदीप कुमार कौशिक और उनकी पत्नी अनीता कौशिक स्कूलों में अभियान चलाकर बच्चाें को नन्हीं गौरैया के संरक्षण के लिए प्रेरित कर रहे है। अधिवक्ता ने बताया कि उन्हाेंने गत्ते के घोंसले बनाकर कई स्कूलों में लगवाए है। इनमें गौरैया आकर अपना घर बना रही हैं। इस दृश्य को देखकर मन बहुत ही प्रसन्न हो जाता है। उनकी पत्नी अनीता कौशिक ने बताया कि बच्चों को गौरैया संरक्षण के लिए जागरूक करना अच्छा लगता है। बच्चों को लकड़ी व गत्ते के सुंदर गौरैया घर बनवाए के लिए प्रेरित किया जाता है । उन पर सुंदर आकृतियां बनाई जाती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें