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हिंदी भाषा ही हमारी उन्नति का मूल

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शिक्षिका विनिता चौधरी। - फोटो : BARAUT
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हिंदी हैं हम
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शिक्षक बोले, सभी विभागों में हिंदी भाषा को प्रमुखता से लागू करना चाहिए
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। नई शिक्षा नीति में भी हिंदी भाषा पर अधिक बल दिया गया। शिक्षकों ने कहा कि हिंदी भाषा विशाल जनसमूह की भाषा है। हिंदी भाषा का इतिहास हजारों साल पुराना है। हमारी पकड़ भाषा पर है तो देश की उन्नति तेज होगी। हिंदी भाषा ही हमारी उन्नति का मूल है। सभी विभागों में हिंदी भाषा को प्रमुखता से लागू करना चाहिए।
केन्द्रीय विद्यालय दिल्ली के पूर्व प्रधानाचार्य विनोद भारद्वाज ने कहा कि हिंदी हमारी संपर्क भाषा होने के साथ राष्ट्रभाषा भी है। यह हमारे संस्कारों को पोषित करती है। हिंदी एक विशाल जनसमूह, अनुशासन और शिष्टाचार की भाषा है। हिंदी भाषा विशाल भू-भाग पर बोली जानी वाली एवं समझी जाने वाली भाषा है। हिंदी भाषा प्राचीन संस्कृति एवं आधुनिक प्रगति को आपस में जोड़ती है। हिंदी भाषा ही हमारी उन्नति का मूल है।
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कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की डीसी संगीता शर्मा ने बताया कि हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा है। संस्कृत के बाद हिंदी ही एक भाषा है जो अब इस देश में प्रचलित है। काफी लोग अंग्रेजी को ही पसंद करते हैं जो कि गलत है। हमारे आपसी मेल मिलाप के लिए हिंदी भाषा अति आवश्यक है। देश में सर्वमान्य होने के कारण हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार बहुत जरूरी है। सभी सरकारी कार्य हिंदी भाषा में होने जरूरी है।
हलालपुर उच्च प्राथमिक विद्यालय इंचार्ज की प्रधानाध्यापिका शिक्षिका विनीता चौधरी व दिगंबर जैन इंटर कॉलेज के शिक्षक अजय राज शर्मा ने कहा कि हिंदी भाषा को पूरे देश में मातृभाषा को महत्व दिया जाता है। दिनचर्या से लेकर हर विभाग में हिंदी भाषा में काम हो तो हिंदी भाषा को राष्ट्र स्तर पर पहुंचा सकते हैं। हिंदी भाषा का प्रयोग लगभग सभी जगह होने लगा है। बदलते दौर के साथ हिंदी का प्रचलन भी बढ़ता जा रहा हैैं। इससे राष्ट्र स्तर पर परिणाम सकारात्मक होंगे।
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श्रीराम शिक्षा मंदिर इंटर कॉलेज के शिक्षक योगेश राणा ने बताया कि हिंदी मातृभाषा की महता को बनाए रखने के लिए सरकार के साथ हमें भी प्रयास करने चाहिए। दिनचर्या में हिंदी भाषा के शब्दों अपनाना चाहिए। हिंदी स्वाभिमान व गौरव का प्रतीक हैं। हिंदी भाषा संस्कारों का खजाना है। साथ ही कम पढ़े-लिखे लोग भी आसानी से समझ सकते हैं।
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