खेकड़ा तहसील के पास दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाईवे पर हुए गड्ढे
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बागपत। एनएचएआई के सर्वे में दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाईवे 709बी में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से लोनी के खजूरी पुश्ते तक 89 गड्ढे हैं। जिनमें 2.4 किमी की सडक़ टूटी हुई है। एनएचएआई का सर्वे पूरा हो चुका है और अब नेशनल हाईवे की हालत सुधारने के लिए काम शुरू कराया जाएगा। जिसके लिए सर्वे रिपोर्ट के आधार पर टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। चुनाव बाद नेशनल हाईवे को गड्ढा मुक्त करने का दावा किया जा रहा है।
दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाईवे से होकर जिले के साथ आसपास के अन्य जिलों के लोग नौकरी व कारोबार करने दिल्ली जाते हैं। जिससे करीब 40 हजार वाहन रोजाना नेशनल हाईवे से गुजरते हैं। ईपीई से लोनी तक करीब 14 किमी की सडक़ में गड्ढे हैं। जिससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसके साथ ही सड़क़ किनारे सांकरौद, डूंडाहेड़ा, हसनपुर मंसूरी, नूरपुर, सुभानपुर आदि ग्रामीणों को सडक़ पर धूल उड़ने व गड्ढे होने से परेशानी बढ़ी हुई है। नेशनल हाईवे के इस हिस्से में तीन महीने पहले भी गड्ढे थे, उस पर लाखों रुपये खर्च करके गड्ढे भरने की खानापूर्ति की गई थी। जिससे अब ज्यादा स्थिति खराब हो गई है। इस कारण ही जाम की स्थिति बनी रहती है। सुभानपुर निवासी संजय त्यागी समेत अन्य ने एनएचएआई को शिकायत की तो निर्माण कंपनी का टेंडर रद्द करने के लिए नोटिस जारी कर नेशनल हाईवे की हालत सुधारने को सर्वे शुरू कराया। ईपीई से लोनी पुश्ते तक सर्वे पूरा हो चुका है। उसकी रिपोर्ट भी इंजीनियरों ने बनाकर अधिकारियों को सौंप दी है। जिसमें बताया कि नेशनल हाईवे पर करीब 14 किमी में 89 गड्ढे हैं और वह टूटा हुआ है। जिससे अलग-अलग जगह पर करीब 2.4 किमी का निर्माण करना होगा। उसके खर्च का ब्योरा भी बनाया गया है। जिससे जल्द ही नेशनल हाईवे की हालत सुधरने की उम्मीद जगी है।
नेशनल हाईवे की हालत सुधरने पर मिलेगी राहत
नेशनल हाईवे की ईपीई से बागपत की तरफ हालत काफी ठीक है, जबकि ईपीई से दिल्ली की तरफ टूटा हुआ है। इस कारण वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ती है। उस पर सफर करना मुश्किल है। अब नेशनल हाईवे की हालत सुधरने से वाहन चालकों की समस्या दूर हो जाएगी।
नेशनल हाईवे की हालत सुधारने के लिए सर्वे हो चुका है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जल्द टेंडर जारी करके हाईवे ठीक कराया जाएगा। जिससे वाहन चालकों को राहत मिलेगी।-अरविंद कुमार, परियोजना निदेशक एनएचएआई