- गांवों में विकास कार्यों में घपला करने का आरोप लगा सचिवों को पहले निलंबित किया
- अब डीडीओ और डीपीआरओ ने क्लीन चिट देकर केवल कठोर चेतावनी देकर बहाल किया
- सचिवों को पहले निलंबित करने से लेकर पुराने वेतन के साथ बहाली पर उठ रहे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। पंचायती राज विभाग के खेल भी निराले है। पहले गांवों में विकास कार्यों में लाखों का घपला बताकर सचिवों को निलंबित कर दिया। अब उनको केवल चेतावनी देकर बहाल कर दिया गया। बहाल भी पुराना वेतन देने के आदेश के साथ किया गया है। इस तरह यह सवाल खड़ा हो गया है कि पहले जांच करने वाले अधिकारी गलत थे या दोबारा जांच सही नहीं की गई है।
जिला विकास अधिकारी बीबी सिंह ने गौरीपुर जवाहरनगर में सचिव रहे राकेश कुमार को निलंबित करने के लिए तीन दिसंबर 2021 को आदेश जारी किया। इसमें उन पर वित्तीय अनियमितता व गबन का आरोप लगाया गया था। सीडीओ रंजीत सिंह के निर्देश पर राकेश को निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा बीबी सिंह ने ही खेकड़ा ब्लॉक के ग्राम विकास अधिकारी सोनू तोमर को निलंबित किया था। उन पर कार्य में लापरवाही और अधिकारियों के निर्देश नहीं मानने के साथ ही बैठकों में उपस्थित नहीं होने का आरोप लगाया गया था। इनके अलावा टांडा के सचिव गौरव राणा पर लाखों रुपये की अनियमितता व गबन का आरोप लगाते हुए पांच अक्टूबर 2021 को तत्कालीन डीपीआरओ बनवारी सिंह ने निलंबित किया था। मगर, इन सभी को पुराना वेतन देने के साथ ही बहाल कर दिया गया है।
गौरीपुर जवाहरनगर के सचिव रहे राकेश कुमार व सोनू तोमर को जिला विकास अधिकारी बीबी सिंह ने बहाल करने के आदेश दिए। बताया कि गया कि इनकी दोबारा जांच कराई गई थी। इस जांच अधिकारियों ने क्लीन चिट दी। इस पर कठोर चेतावनी देते हुए बहाल किया गया है। इस तरह ही गौरव राणा को बहाल करने के आदेश कठोर चेतावनी के साथ ही डीपीआरओ अमित त्यागी ने किए है। इन दोनों पर वित्तीय अनियमितता व गबन के आरोप थे, जिसकी दोबारा जांच खंड विकास अधिकारी बिनौली से कराई गई है। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर पहले और अब जांच करने वाले अधिकारी में किसने सही तरीके से जांच की है।
मैने केवल गौरव राणा को बहाल किया है। डीएम के अनुमोदन पर बहाल किया गया है। अन्य सचिवों की बहाली के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। उसके बारे में उनको बहाल करने वाले ही बता सकते है। - अमित त्यागी, डीपीआरओ
पहली रिपोर्ट के आधार पर सचिवों को निलंबित किया गया था। दूसरी जांच कराई गई तो उसमें गबन की बात सामने नहीं आई। उस जांच रिपोर्ट के आधार पर सचिव को बहाल किया गया है। - बीबी सिंह, जिला विकास अधिकारी