संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जिले को आग से बचाने के लिए दमकल विभाग के पास न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही पर्याप्त स्टाफ। आग लगने पर विभाग को मेरठ व गाजियाबाद जनपद से दमकल की गाड़िय़ां बुलानी पड़ती हैं। इसके अतिरिक्त जिले में दोनों एफएसओ के पद खाली हैं, जबकि तीन चालक, एक हेड कांस्टेबल और तीन कांस्टेबलों के पद रिक्त हैं।
भीषण गर्मी का सीजन चल रहा है। जिले में अप्रैल से लेकर अभी तक 50 से अधिक आगजनी की घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें 50 लाख रुपये से अधिक का सामान जलकर नष्ट हो चुका है। जिले में अधिकतर घटनाएं शार्ट सर्किट व लापरवाही के कारण हुई हैं। 15 लाख से अधिक आबादी वाले बागपत जनपद में आगजनी की घटनाओं पर काबू पाने के लिए पर्याप्त संसाधन व स्टाफ उपलब्ध नहीं है। जिले में दमकल विभाग के बड़ौत व खेकड़ा तहसील में फायर स्टेशन हैं और पुलिस लाइन में फायर यूनिट स्थापित कराई गई है। जिले में आगजनी पर काबू पाने के लिए पांच हजार लीटर वाली दो बड़ी गाड़ियां, 2500 लीटर वाली दो गाड़ियां, वाटरनिस्ट तथा फायर बुलेट हैं। पानी की आपूर्ति के लिए चार पंप हैं।
स्टाफ की कमी
बड़ौत व खेकड़ा फायर स्टेशन पर दो एफएसओ के पद खाली हैं। छह हेड कांस्टेबल के सापेक्ष पांच हेड कांस्टेबल है। इसके अतिरिक्त नौ चालकों के सापेक्ष छह हैं। वहीं, 42 कांस्टेबलों के सापेक्ष 39 कांस्टेबल तैनात हैं।
मेरठ के सीएफओ के पास है जिले की जिम्मेदारी
बागपत जिले में एक भी एफएसओ की तैनाती नहीं होने से अग्निशमन विभाग की पूरी जिम्मेदारी मेरठ के सीएफओ संतोष कुमार राय के पास है। जिन्हें सभी आगजनी की घटनाओं की अपडेट दी जाती है।
वर्जन-
फायर स्टेशन के अनुसार जनपद में स्टाफ कम है। उच्चाधिकारियों रिक्त पदों पर तैनाती की डिमांड भेजी गई है।- नरेंद्र कुमार सिंह, एफएसएसओ