बागपत। दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनोमिक कॉरिडोर के लिए अधिगृहित जमीन के नक्शे तहसील में होने के बावजूद किसानों से मांगे जा रहे हैं। आरोप है कि नक्शे नहीं देने के कारण राजस्व विभाग के कर्मचारी सभी किसानों पर रुपये देने का दबाव बना रहे हैं। इसके विरोध में किसानों ने कलक्ट्रेट पर पहुंचकर हंगामा किया। इसके साथ ही मुआवजा बढ़ाकर देने व सर्विस रोड बनाने समेत अन्य मांगों को लेकर चार जिलों के किसान 22 नवंबर को एनएचएआई के परियोजना निदेशक के कार्यालय पर धरना देंगे।
दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनोमिक कॉरिडोर के लिए चार जिलों बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर के सैकड़ों किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है। किसानों को जमीन का 2015 के सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा दिया जा रहा है। इसके बाद से सर्किल रेट नहीं बढ़ाया गया है। किसान 2021 के सर्किल रेट तय करके मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।
किसान इसके अतिरिक्त सर्विस रोड समेत अन्य मांग उठा रहे हैं। आरोप है कि इन मांगों को अभी तक पूरा नहीं किया गया है। किसानों पर नक्शा 41 व 45 देने का दबाव राजस्व विभाग के कर्मचारी बना रहे हैं। हालांकि किसानों के पास ये नक्शे नहीं हैं और ये केवल राजस्व विभाग में होते हैं। किसानों का आरोप है कि नक्शे नहीं देने पर रुपये मांगे जा रहे हैं। इस तरह की शिकायत शामली, सहारनपुर व मुजफ्फरनगर में हुई तो अधिकारियों ने नक्शे नहीं मांगने का आदेश जारी कर दिया। बागपत में किसानों पर अभी नक्शे देने का दबाव बनाया जा रहा है। इसको लेकर ही किसानों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। इस दौरान कंडेरा से राजीव तोमर, राकेश अहलावत, सरूरपुर से यशवीर, सुशील कुमार, रवींद्र, सुरेश पाल, विनोद, टीकरी से सहेंद्र पाल राठी, कौशेंद्र, नौरोजपुर से प्रियव्रत, अमित, ओमप्रकाश प्रधान, गांगनौली से अशोक राठी, राजपाल राठी, सचिन राठी, शिवम राठी, बिजरौल से सनोज, सतेंद्र, तिरसपाल, वेद सिंह आदि मौजूद रहे।