दो पदों के सापेक्ष महज एक चिकित्सक की तैनाती
संवाद न्यूज एजेंसी
दोघट। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दाहा पर एक लाख से ज्यादा आबादी की सेहत दुरुस्त रखने का जिम्मा है। इसके चलते इसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने की मांग की जा रही है। यहां चिकित्सक का एक पद अरसे से रिक्त है।
दाहा में 1964 में राजकीय डिस्पेंसरी की स्थापना हुई थी। 1990 में इसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया। इसके चलते यहां भवन का निर्माण कराया था। यह फिलहाल जर्जर हाल में है। पानी की टंकी भी बंद पड़ी है। चिकित्सकों के दोनों आवास खंडहर हो चुके हैं। जगह-जगह से चहारदीवारी टूटी है। सुविधाओं के अभाव में लोगों को निजी चिकित्सकों से उपचार कराना पड़ता है। कई बार अप्रशिक्षितों के जाल में फंसकर लोग जान तक गवां बैठते हैं।
रालोद नेता पप्पन राणा का कहना है कि सीएचसी पर क्षेत्र के जनता को समुचित स्वास्थ्य सेवा मिलनी चाहिए। वहीं, चौगामा किसान क्लब के अध्यक्ष देवेंद्र राणा का कहना है कि क्षेत्र से बागपत और मेरठ करीब 40-40 किलोमीटर दूर हैं। वहां मरीज को ले जाने में परेशानी उठानी पड़ती हैं। अधिवक्ता प्रियव्रत राणा का कहना है कि क्षेत्र के लोगों को अधिक चिकित्सीय सुविधाएं दिलाने के लिए जनप्रतिनिधि अपने स्तर पर प्रयास करने चाहिए। निरपुड़ा निवासी तेजपाल सिंह राणा का कहना है कि दाहा पीएचसी को सीएचसी बनाए जाने की मांग लंबे समय की जा रही है। कोई भी जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। दाहा पीएचसी प्रभारी डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि सीडीओ अभिराम त्रिवेदी ने एक सप्ताह पूर्व पीएसची का निरीक्षण किया था। संभव है कि जल्द समस्या का समाधान हो जाएगा।