बड़ौत में रेलवे काॅलोनी परिसर में पेयजल पंप हाउस लगाने के नाम पर लाखों रुपये पानी में बहा दिए गए। लेकिन पेयजल पंप हाउस बिना चालू हुए ही फेल हो गया। यही नहीं पंप को बिना चालू कराए ही ठेकेदार को पूरा भुगतान कर दिया गया। जबकि एक बूंद भी पानी नहीं मिल सका। मामला उजागर हुआ तो विभागीय अफसरों ने मामले को दबाने के लिए दूसरा पेयजल पंप हाउस स्थापित करा दिया। हालांकि अब मामले की जांच की जा रही है। संबंधित ठेकेदार से संपर्क कर भुगतान का पैसा वापस लेने का प्रयास किया जा रहा है।
चार वर्ष पहले खराब हुआ था पंप
रेलवे काॅलोनी में दो पंप हाउस से पेयजल की आपूर्ति की जाती थी, लेकिन एक पंप हाउस तकरीबन चार साल पहले खराब हो गया था। इस वजह से पेयजल आपूर्ति का पूरा भार पंप हाउस द्वितीय पर आ गया था। उसमें में भी आए दिन तकनीकी खराबी आने लगी, जिससे लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ा।
रेलवे प्रशासन ने वर्ष 2019-2020 में एक अन्य पेयजल पंप हाउस स्थापित कराया। पेयजल पंप हाउस लगाने में लगभग छह लाख रुपये की लागत आई, लेकिन इस बीच नगरपालिका प्रशासन के सहयोग से रेलवे काॅलोनी में पेयजल आपूर्ति सुचारू करा दी गई, जिसका फायदा उठाते हुए संबंधित कर्मचारियों ने ठेकेदार को पंप हाउस को बिना चालू कराए पूरा भुगतान कर दिया।
जब पंप को चालू करने का प्रयास किया गया तो वह फेल हो गया। एक बूंद भी पानी नहीं मिल सका। मामला उजागर हुआ तो रेलवे अफसरों में हड़कंप मच गया। पूरे प्रकरण को लेकर मामले में जांच की जा रही है। साथ ही जीआरपी थाने के पास एक अन्य पंप हाउस स्थापित कराया गया, अब जल्द ही उससे पेयजल आपूर्ति कराई जाएगी।
नहीं होने दी जाएगी सरकारी खजाने की बर्बादी
उन्होंने कुछ माह पूर्व ही यहां पर चार्ज संभाला है। चार्ज मिलने के कुछ समय बाद से ही काॅलोनी से पेयजल आपूर्ति की शिकायत प्राप्त होने लगी तो, पूर्व में लाखों रुपयों की लागत से स्थापित किए गए पंप हाउस को चालू कराने का प्रयास किया गया, तो वह फेल हो गया, जबकि पंप को बिना चालू कराए ठेकेदार को पूरा भुगतान करा दिया गया, यह क्या वजह रही, इसकी जांच की जा रही है। सरकारी खजाने को ऐेसे बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। फिलहाल पेयजल आपूर्ति के लिए जीआरपी थाने के पास दूसरा पंप हाउस स्थापित करा गया गया है। -थान सिंह, आईओडब्ल्यू रेलवे विभाग बड़ौत