तीन लोकसभा क्षेत्र वाले बिजनौर में चुनावी माहौल पूरे शबाब पर है। प्रचार के माध्यम से राजनीति के रणबांकुरे जीत के लिए नित नए तरीके आजमा रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत तमाम भगवा ब्रिगेड रैलियों के जरिए दोनों सीटों पर घेराबंदी कर चुके हैं। इससे इतर सपा के स्टार प्रचारक अभी मैदान से दूर नजर आ रहे थे, लेकिन घेराबंदी तोड़ने 13 अप्रैल को अखिलेश यादव जिले में आ रहे हैं। 16 अप्रैल को मायावती भी जिले में चुनावी जनसभा को संबोधित कर सकती हैं।
जिले के परिदृश्य पर नजर डालें तो यह तीन लोकसभा बिजनौर, नगीना और मुरादाबाद से जुड़ा है। जहां बिजनौर लोकसभा में दो विधानसभा सदर बिजनौर और चांदपुर आती हैं। वहीं नगीना लोकसभा में नगीना, नजीबाबाद, धामपुर, नूरपुर, नहटौर विधानसभा आती हैं। सभी पार्टियां प्रचार तेज करती जा रही हैं। ऐसे में भाजपा-रालोद की घेराबंदी सबसे तेज होती दिख रही है। अब तक बिजनौर, चांदपुर और नगीना में सीएम योगी खुद जनसभा कर चुके हैं। चांदपुर में ही चौधरी जयंत सिंह जनसभा कर चुके हैं। बिजनौर में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी जनसभा कर चुके हैं।
बड़े नामों में जिले में एक नाम मंगलवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का भी जुड़ गया। धामपुर में मंगलवार को जेपी नड्डा ने जनसभा कर नगीना लोकसभा के साथ-साथ मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र की बढ़ापुर विधानसभा के लोगों को भी साधने का काम किया। अब 13 अप्रैल को फिर से सीएम योगी अफजलगढ़ क्षेत्र में आ रहे हैं। मुरादाबाद लोकसभा की बढ़ापुर विधानसभा के साथ-साथ इससे सटी नगीना लोकसभा की धामपुर, नगीना विधानसभा को भी साधने का काम करेंगे। उधर, बसपा की ओर से बड़े स्टार प्रचारकों में आकाश आनंद की जनसभा नगीना में हो चुकी है।
एक-दूजे के कोर वोट में सेंधमारी
बिजनौर में भाजपा, सपा और बसपा एक दूसरे के वोटबैंक में सेंध का प्रयास कर रहे हैं। बता दें कि बसपा ने जाट उम्मीदवार बिजेंद्र सिंह पर दांव खेला है जबकि सपा ने भाजपा के कोर वोटर समझे जाने वाली सैनी बिरादरी से दीपक सैनी को मैदान में उतारा है। ऐसे में बसपा उम्मीदवार जाट मतदाताओं में सेंधमारी और सपा उम्मीदवार सैनी मतदाताओं में सेंधमारी का प्रयास कर रहे हैं। जबकि रालोद उम्मीदवार बसपा के दलितों में जोड़-तोड़ का प्रयास कर रहे हैं।
छपरौली व मोदीनगर पर टिका चुनाव का दारोमदार
गपत लोकसभा सीट का चुनाव पूरी तरह से छपरौली व मोदीनगर पर केंद्रित हो गया है। छपरौली विधानसभा क्षेत्र चौधरी परिवार का गढ़ होने के कारण पहले रालोद को बड़ी बढ़त मिलती थी, वहीं पिछले दो चुनाव से वहां के लोग कम साथ दे रहे हैं। इसलिए इस बार रालोद को छपरौली से बड़ी उम्मीद है। वहीं मोदीनगर में ब्राह्मण काफी होने के कारण सपा को सेंधमारी का डर है। वहां रालोद सेंधमारी रोकने में कामयाब हो जाता है तो उसकी राह आसान हो सकती है।
बागपत लोकसभा सीट के सभी विधानसभा क्षेत्रों का मिजाज अलग-अलग है। इनमें शामिल छपरौली को चौधरी परिवार का गढ़ कहा जाता है, क्योंकि विधानसभा चुनाव में वर्ष 1937 से लगातार वहां चौधरी परिवार या उनकी पार्टी का कब्जा है। लोकसभा चुनाव में भी चौधरी परिवार को वहां से मुस्लिम-जाट समीकरण के कारण हमेशा तीस हजार से ज्यादा बढ़त मिलती रही है। मगर, पिछले दो लोकसभा चुनाव से छपरौली में चौधरी परिवार की पकड़ कमजोर होती दिख रही है।
हालात यहां तक हो गए कि वर्ष 2014 में छपरौली में करीब 15 हजार वोट से रालोद को भाजपा ने हरा दिया। हालांकि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में छपरौली से रालोद जीत गया, मगर वहां से बढ़त केवल 13 हजार वोटों की रही। इस बार रालोद-भाजपा का गठबंधन है और छपरौली से पहले की तरह बढ़त की उम्मीद वह लगाए हुए है। क्योंकि बगापत और बड़ौत में वोटों का अंतर ज्यादा नहीं रहा और सिवालखास के मुस्लिमों का रूख पिछले चुनावों की तरह रहा तो छपरौली की बढ़त फायदा पहुंचा सकती है। रालोद के साथ ही अन्य पार्टियों के प्रत्याशियों की नजर भी उसपर टिकी है जो मुस्लिम व अन्य बिरादरी पर नजर गड़ाए हुए हैं। उधर, मायावती का बागपत में जनसभा प्रस्तावित है।
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मोदीनगर में ब्राह्मण मतों में बिखराव रोकना चुनौती
मोदीनगर विधानसभा सीट के वोटरों ने पिछले दो चुनावों से भाजपा का साथ दिया है। जहां वर्ष 2014 के चुनाव में करीब 68 हजार वोटों की बढ़त भाजपा को मिली थी, वहीं वर्ष 2019 में करीब 37 हजार वोटों की बढ़ती मिली थी। इस सीट पर ब्राह्मण वोटर काफी हैं। इसको देखते हुए ही सपा ने ब्राह्मण कार्ड खेलकर अमरपाल शर्मा को प्रत्याशी बनाया है। यह डर भी रालोद-भाजपा गठबंधन को सता रहा है। इस सेंधमारी को रोकना उनके लिए चुनौती है।
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