बागपत। डूडा में करोड़ों रुपये का घोटाला मामला सामने आने के बावजूद छह हजार फाइलों को डीएम के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेज दिया। उनमें अपात्रों की फाइलों को शामिल किए जाने के शक में डीएम ने दोबारा जांच का आदेश देते हुए उन्हें लौटा दिया। उन्होंने साफ किया कि यदि किसी अपात्र को किस्त जारी हुई तो डूडा के अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में पक्का मकान बनवाने के लिए डूडा (जिला शहरी विकास अभिकरण) में आवेदन करना होता है। उसके सत्यापन की जिम्मेदारी दो निजी कंपनियों को दी गई है। यहीं से खेल की शुरूआत होती है। उन निजी कंपनियों के कर्मचारी खेल करके फाइल को आगे बढ़ा देते हैं। इसके बाद डूडा व नगर पालिका-पंचायतों के अधिकारियों को जांच करनी होती है। इसमें देखा जाता है कि आवेदनक पात्र है या नहीं। सरकार के नियम अनुसार आवेदक गरीब हो, उसके पास पहले से पक्का मकान न हो, वह नगर पालिका-पंचायत के दायरे में आता हो, जमीन उसके नाम हो आदि। डूडा व नगर पालिका-पंचायत के अधिकारियों की जांच रिपोर्ट के बाद ही आवेदक को योजना के तहत तीन किस्त में ढाई लाख रुपये जारी किए जाते हैं। इस प्रक्रिया में अपात्रों को योजना का लाभ देकर करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया। जिसमें यमुना खादर में मकान बनवा दिए तो जमींदारों, पुलिसकर्मी की पत्नी, रिटायर्ड पटवारी, डाकघर कर्मी समेत अन्य को योजना लाभ दिया गया।
करोड़ों रुपये के घोटाले के बावजूद परियोजना अधिकारी ने छह हजार फाइलों को अंतिम मंजूरी के लिए डीएम के पास भेज दिया। यह बताया जा रहा है कि इनमें भी सैकड़ों अपात्र शामिल हैं। उनकी जांच के नाम पर खानापूर्ति करके फाइल डीएम के पास भेजी गई है। वहीं, डीएम राजकमल यादव ने उन सभी फाइलों को दोबारा जांच के लिए लौटा दिया है।
मेरे पास डूडा से जितनी फाइल आई थीं, उन्हें दोबारा जांच कराने के लिए लौटा दिया। पुन: जांच नहीं होने तक उन फाइलों की मंजूरी नहीं होगी।-राजकमल यादव, डीएम