चांदीनगर। रटौल गांव में सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण नहर पटरी टूटने से दर्जनों किसानों की लाखों रुपये की फसल बर्बाद हो गई। सूचना देने के घंटों बाद तक भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। किसानों ने सिंचाई विभाग के प्रति आक्रोश व्यक्त करते हुए मुआवजा दिलाने की मांग की है।
रटौल कस्बे के शफाकत चौधरी, मुजफ्फर चौधरी, हामिद चौधरी, सलीम, कलाम आदि दर्जनों किसानों ने बताया कि उनके खेत पूर्वी यमुना नहर के किनारे है। सोमवार शाम करीब पांच बजे बारिश की वजह से पानी की अधिकता के कारण नहर की पटरी एक तरफ से करीब 30 फीट टूट गई। इसके चलते खरक, रटौल, विनयपुर, डगरपुर, तिगरी आदि गांवों के दर्जनों किसानों की सैकड़ों बीघा खेतों में पानी भर गया। इससे धान, सब्जी आदि की फसल जलमग्न हो गई। वहीं रटौल के कलाम की मशहूर नर्सरी में भी जलभराव के चलते सैकड़ों आम के पौधे खराब हो गए। अत्यधिक पानी के कारण किसानों की फसल बर्बाद होने से लाखों रुपये की क्षति हुई है। किसानों ने सिंचाई विभाग के कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। नहर की पटरी टूटने की सूचना देने के पांच घंटे बाद सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने नहर को बंद किया। मौके पर कोई भी अधिकारी या कर्मचारी नहीं पहुंचा। आरोप है कि यदि सूचना मिलने पर तत्काल ही नहर को बंद कर दिया जाता और सिंचाई विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंच जाते तो किसानों की फसलों में कम नुकसान होता। पीड़ित किसानों ने जिलाधिकारी से मुआवजा दिलाने की मांग की है।