रालोद और सपा ने चुनाव अलग-अलग लड़ा, अध्यक्ष पद पर साथ आना होगी मजबूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। पंचायत चुनाव के नतीजों के मुताबिक कोई भी राजनीतिक दल अध्यक्ष पद पर अकेले दम पर जीत दर्ज करने की स्थिति में नहीं है। सपा और रालोद ने जिले में पंचायत चुनाव अलग-अलग लड़ा। एक-दूसरे के सामने प्रत्याशी उतारे परंतु अब एक-दूसरे के बिना अध्य़क्ष पद पर जीत दर्ज करना मुश्किल है। अब दोनों दलों को साथ आना पड़ेगा। जिला पंचायत अध्यक्ष पद किसकी झोली में जाएगा। इसको लेकर दोनों पार्टियों के बीच घमासान होने की आशंका है। कुल 20 सीटों में से रालोद ने आठ और सपा ने चार वार्डों में जीत दर्ज की है।
किसान आंदोलन के दौरान गैर भाजपाई दलों ने साथ मिलकर सरकार घेरने की भरपूर कोशिश की। ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा के वोट बैंक को नुकसान पहुंचाने की रणनीति तैयार की। रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साथ मंच भी साझा किया। पंचायत चुनाव साथ लडकर भाजपा को हराने का खाका भी तैयार किया गया था। जिससे दोनों दलों के जिला स्तरीय नेता भी साथ मिलकर पंचायत चुनाव लड़ने का मन बना चुके थे। बागपत में सीट बंटवारे का समय आया तो सारे समीकरण उलझ गए। सभी दल किसान आंदोलन के जरिए अपनी स्थिति पहले से मजबूत मानने लगे। ऐसे माहौल में दूसरे दलों के लिए अधिक सीट छोड़ने के लिए कोई भी पार्टी तैयार नहीं हुई। एक-दूसरे के साथ मिलकर भाजपा को शिकस्त देने की रणनीति बनाने वाले अब खुद चुनावी मैदान में आमने-सामने आ गए।
इन वार्डों में सपा और रालोद थे आमने-सामने
जिले के कुल 20 जिला पंचायत सदस्य पदों में से वार्ड एक, दो, तीन, चार, पांच, छह, आठ, दस, 11, 14, 16 में रालोद और सपा के प्रत्याशी आमने-सामने चुनाव लड़े। रालोद के आठ और सपा के चार प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। अब अध्य़क्ष पद पर दोनों पार्टियों के नेतृत्व की क्या रणनीति रहेगी। इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं।