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पत्नी के कंधों पर आई दो मासूमों और बुजुर्ग सास-ससुर की जिम्मेदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। कोरोना महामारी कई परिवारों के लिए जिंदगी भर के दंश का कारण बन गई। होश संभालने से पहले ही कई मासूमों के अभिभावक काल के गाल में समा गए। घर में इकलौते कमाने वाले सदस्य के चले जाने से अब ऐसे बच्चों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। उनकी पढ़ाई-लिखाई और भरण-पोषण कैसे होगा, यह गंभीर सवाल है।
बाखरपुर बालैनी निवासी राकेश इलैक्ट्रीशियन का काम करते थे। इसी से घर का खर्च किसी तरह चलता था। इसके अलावा पिता ब्रह्म सिंह काफी बुजुर्ग होने के बावजूद मजदूरी करते हैं। राकेश की अप्रैल माह के अंत में तबियत बिगड़ी। वह बुखार से पीड़ित हो गए। दवा लेने पर बुखार तो उतर गया, लेकिन सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगी। बाद में कोरोना की जांच कराने पर उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 26 अप्रैल को उन्हें खेकड़ा कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां छह मई को उनकी मौत हो गई। इससे परिजनों में कोहराम मच गया। राकेश की पत्नी पूनम, पिता ब्रह्म सिंह और मां माया देवी पर दुखों का पहाड़ टूट गया। उनके सात वर्षीय बेटे रोहन और पांच वर्षीय बेटी पल्लवी को इस बात का अहसास ही नहीं कि उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। अब परिवार के सामने बड़ा संकट मासूम रोहन और पल्लवी की परवरिश का है। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है। राकेश की मां माया देवी लंबे समय से बिस्तर पर है। ऐसे में पूनम के सामने बच्चों और सास-ससुर की जिम्मेदारी आ गई है। बच्चों के भविष्य की चिंता पल्लवी को खाए जा रही है। ग्रामीण भी परिवार पर संकट को देखते हुए दुखी हैं। उनका कहना है परिवार को सरकार की ओर से मदद मिलनी चाहिए।