03 दिवसीय फाल्गुनी मेले का शुभारंभ आज से, सभी तैयारी पूरी की गई
दुकानें लगी, सुरक्षा के लिए पहुंचा पुलिस बल, बैरिकेडिंग भी लगाई गई
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। पुरा महादेव के परशुरामेश्वर मंदिर में आज से तीन दिवसीय फाल्गुनी मेला लगेगा। मेला आयोजन को लेकर प्रशासन और मंदिर समिति ने सभी तैयारियां पूरी कर ली है। मेला परिसर में दुकानें सज चुकी है और सुरक्षा के लिए पुलिस बल पहुंच गया है। मेले की सुरक्षा के लिए 32 सीसीटीवी कैमरे और कंट्रोल रूम बनाया गया है। मंदिर परिसर के बाहर वॉच टावर से भी निगरानी की जाएगी। शनिवार को अधिकारियों ने मंदिर परिसर और मेला परिसर का निरीक्षण की व्यवस्थाएं देखी और सुरक्षा कर्मियों को दिशा-निर्देश दिए।
पुरा महादेव के परशुरामेश्वर मंदिर में रविवार से तीन दिवसीय फाल्गुनी मेला शुरू होगा। दो साल से कोरोना संक्रमण के कारण मेला आयोजन नहीं किया जा रहा था। मगर, अब संक्रमण के मामले कम होने और नाइट कर्फ्यू हटने से मेले का आयोजन हो रहा है। मेला आयोजन के लिए मंदिर समिति और जिला प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली है। भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ियों और श्रद्धालुओं को परेशानी न हो, इसके लिए बैरिकेडिंग के अलावा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए है। मंदिर और मेला परिसर में 32 सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए है। मंदिर में कंट्रोल रुप स्थापित कर कर्मचारी तैनात कर दिए है। सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल पुरा महादेव पहुंच गया है।
28 की सुबह होगा झंडारोहण
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित जयभगवान शर्मा ने बताया कि मेले की सभी तैयारियां पूरी कर ली है। सोमवार को सुबह तीन बजकर 25 झंडारोहण के उपरांत चौदस का जलाभिषेक शुरू किया जाएगा। श्रद्धालुओं को भगवान शिव का जलाभिषेक करने में परेशानी न हो, इसके लिए मंदिर के गर्भगृह में पुलिसकर्मी व मंदिर समिति के सदस्य मौजूद रहे।
आस्था का केंद्र पुरा महादेव मंदिर, जलाभिषेक से पूरी होती है कामना
बालैनी (बागपत)। मुख्यालय से 25 किमी दूर पुरा गांव का परशुरामेश्वर महादेव मंदिर है। पुजारी पंडित जयभगवान शर्मा के अनुसार यहां कजरी वन हुआ करता था। वन में जमदग्नि ऋषि अपनी पत्नी रेणुका के साथ आश्रम में रहते थे। रेणुका प्रतिदिन कच्चे घड़े में हिंडन नदी से जल भरकर लाती और शिव को अर्पण करती थी। एक बार राजा सहस्त्रबाहु शिकार खेलते हुए आश्रम में पहुंचे। ऋषि की अनुपस्थिति में रेणुका ने राजा का सत्कार किया। राजा वहां से उनकी कामधेनु गाय लेकर जाना चाहता था। रेणुका के विरोध करने पर राजा गुस्से में उसे बलपूर्वक अपने साथ हस्तिनापुर ले गया। रानी ने मौका देखकर रेणुका को मुक्त कर दिया। रेणुका ने वापस आकर ऋषि को सबकुछ बताया। ऋषि ने एक रात्रि अन्य पुरुष के महल में रहने के कारण रेणुका को आश्रम छोड़ने का आदेश दे दिया। रेणुका खुद को पवित्र बताते हुए वहां से नहीं जाना चाहती थी। इस पर ऋषि ने अपने तीन पुत्रों को अपनी माता का सिर धड़ से अलग करने का आदेश दिया। तीनों पुत्रों के मना करने पर चौथे पुत्र परशुराम ने पितृ आज्ञा को अपना धर्म मानते हुए अपनी माता का सिर धड़ से अलग कर दिया। इसके बाद परशुराम को इसका पश्चाताप हुआ। वह पश्चाताप करने के लिए घोर तपस्या करते हुए कुछ दूर ही शिवलिंग स्थापित कर उसकी पूजा करने लगे। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें प्रत्यक्ष दर्शन दिए। उन्होंने अपनी माता को दोबारा जीवित करने की प्रार्थना की। भगवान शिव ने उनकी माता को जीवित कर दिया और उनको एक फरसा भी दिया। उस फरसे से परशुराम ने राजा सहस्त्रबाहु व उनकी सेना को मार दिया। इसके बाद परशुराम ने शिवलिंग की स्थापना करके वहां मंदिर बनवाया था।
बुढ़सैनी मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं को उठानी होगी परेशानी
पुरा गांव में पुरा-बुढ़सैनी मार्ग पर जलभराव और कीचड़ होने से मार्ग में गड्ढे ही गड्ढे है। इस मार्ग से भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। मंदिर आने वालों को जलभराव और कीचड़ से गुजर भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए आना होगा।