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कैंसर का उपचार तो दूर, जांच की भी नहीं सुविधा

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राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस
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विशेषज्ञ न होने पर स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है कैंसर पीड़ितों का डाटा
सुविधाओं के अभाव में दूसरे राज्यों व जनपदों की ओर रुख कर रहे कैंसर रोगी
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। बागपत को जिला घोषित हुए करीब 24 साल बीत चुके है। मगर, स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में आज भी जनपद काफी पीछे है। आलम यह है कि हर गांव में कैंसर के मरीज हैं, लेकिन यहां उपचार की बात तो दूर, कैंसर पीड़ित मरीजों की जांच तक की सुविधा नहीं है और न ही जनपद में कैंसर रोग विशेषज्ञ है। स्वास्थ्य विभाग के पास कैंसर पीड़ितों का डाटा तक नहीं है। सुविधाओं के अभाव में कैंसर पीड़ित दूसरे राज्यों और जिलों की ओर रुख कर रहे है।
काल बन रही नदियां
बड़ौत। जिले के लोगों के लिए हिंडन और कृष्णा नदी अब अभिशाप बन गई है। प्रदूषित जल बीमारियां परोस रहा है। अकेले गांगनौली, निरपुडा, भड़ल, दाहा में ब्लड कैंसर और लीवर कैंसर से मरने वालों की संख्या 80 से अधिक है। गांगनौली गांव में कैंसर की वजह से अब तक भूरो पत्नी फेरू, जल्लो पत्नी बुढढा, रघुवीर पुत्र फूल सिंह, सत्यपाल पुत्र फूल सिंह, प्रभात पुत्र मेघराज, भोपाल पुत्र उमराव सहित दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि गांव के विनोद पुत्र सत्यवीर, कपिल पुत्र रणधीर, मधुर पुत्र सुरेश, ओम पुत्र जीत सहित एक दर्जन से अधिक लोग कैंसर से ग्रस्त है।
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जांच में सामने आ चुकी है हकीकत
बड़ौत। इस क्षेत्र की पानी की जल निगम और अन्य एजेंसियों ने गत दो साल पहले जांच कराई तो हकीकत खुलकर सामने आई। पानी में ही लेड (सीसा) की मात्रा 0.34 मिलीग्राम/लीटर पाई जा चुकी है। यह सामान्य से 34 गुणा अधिक है। इसमें क्रोमियम की मात्रा 1.84 मिलीग्राम/लीटर पाई गई है, जो कि सामान्य से 19 गुणा अधिक है। पेयजल में लेड, क्रोमियम की अधिकता के कारण फेफड़ों का कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारी हो जाती है।
ये बोले लोग
गांगनौली गांव निवासी मास्टर ओम सिंह व संजीव का कहना है कि हिंडन व कृष्णा नदियों में फैक्ट्रियों का गंदा पानी बहता है। सहारनपुर और शामली से आने वाले प्रदूषित जल ने जिले में विकट हालात पैदा कर दिए हैं। बलबीर सिंह पुत्र हरि सिंह कैंसर से पीड़ित है। उनका कहना है कि हैंडपंपों से निकलने वाले पानी में नाइट्रेट, फ्लोराइड, फास्फोरस की मात्रा अधिक है। यहीं कारण है कि एक सौ फीट गहराई तक भूजल प्रभावित हो रहा है।
बच्चों में कैंसर के लक्षण
जिला बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राज सिंह ने बताया कि पीलापन और चकत्ते, चोट के निशान या मुंह या नाक से खून आना, हड्डियों में दर्द, किसी खास हिस्से में अचानक दर्द से बच्चा रात में जाग जाए, बच्चा अचानक चल न सके या वजन उठाने में परेशानी हो, दो हफ्ते से ज्यादा समय से सिर दर्द, सुबह-सुबह बच्चे को उल्टी होना आदि कैंसर के लक्षण है।
महिलाओं में कैसर के लक्षण
जिला स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अंजू बाला का कहना है कि कुछ सालों में महिलाओं में कैंसर की बीमारी बढ़ी है। उन्होंने महिलाओं में महावारी के दौरान रक्तस्त्राव होना, शारीरिक संपर्क के बाद रक्तस्त्राव होना, पेट के नीचे दर्द होना आदि लक्षण बताएं। बताया कि जो मरीज हमारे पास आते हे, उन्हें दिल्ली, सोनीपत आदि जगहों पर भेज दिया जाता है।
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जनपद में न तो जांच की सुविधा है और न ही कैंसर रोग विशेषज्ञ है। जो मरीज हमारे पास आते है, उन्हें हम दिल्ली सहित अन्य जगहों पर भेज देते है। - डॉ. दिनेश कुमार, सीएमओ।
कैंसर के प्रकार
- ब्लड कैंसर
- मुंह का कैंसर
- स्तन कैंसर
- गर्भाशय का कैंसर
- पेट का कैंसर
- गले का कैंसर
- अंडाशय का कैंसर
- मस्तिष्क का कैंसर
कैंसर के कारण
- तंबाकू या गुटखे का सेवन
- सिगरेट और शराब पीना
- लंबे समय तक रेडिएशन के संपर्क में रहना
- शारीरिक निष्क्रियता
- खराब पोषण
- मोटापा
कैंसर के लक्षण
- शरीर के किसी हिस्से में गांठ महसूस होना
- निगलने में कठिनाई होना
- पेट में लगातार दर्द बने रहना
- घाव का ठीक न होना
- त्वचा पर निशान
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
- कफ और सीने में दर्द
- थकान और कमजोरी महसूस करना
- शरीर का वजन अचानक से कम या ज्यादा होना
कैंसर से कैसे बचा जा सकता है
- शराब का सेवन न करें
- रेडिएशन के संपर्क में आने से बचें
- फाइबर युक्त डाइट लें
- धूम्रपान करने से बचें
- डाइट में अधिक फैट न लें
- शरीर का सामान्य वजन बनाए रखें
- नियमित रूप से एक्सरसाइज करें
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