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पांच साल में बसपा ने खोया वोट बैंक, रालोद-भाजपा का बढ़ा

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79 हजार वोट का नुकसान हुआ बसपा को 2017 के विधानभा चुनाव की तुलना में
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1.57 लाख का फायदा हुआ रालोद को, लेकिन सीट में बढ़ोत्तरी नहीं हो सकी
41 हजार वोट बढ़ी भाजपा की इस चुनाव में, दो सीट पर जीत के साथ हुआ फायदा
19 हजार 91 वोट मिली थी कांग्रेस को पिछले चुनाव में, इस बार तीन प्रत्याशी भी इतने नहीं जुटा पाए
अंकित चौहान
बागपत। इस विधानसभा चुनाव में भाजपा और रालोद में सीधा मुकाबला था। वोट का आंकड़ा बता रहा है कि दोनों ही दलों के वोटिंग प्रतिशत में बढ़ोत्तरी हुई है जबकि बसपा और कांग्रेस सहित अन्य को बड़ा नुकसान हुआ है। बसपा को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। 2017 के विधानसभा चुनाव की तुलनात्मक स्थिति बता रही है कि बसपा का वोट बैंक 79 हजार गिर गया है जबकि भाजपा को 41 हजार और रालोद को 1.57 लाख का फायदा हुआ है। खास बात यह है कि रालोद को सबसे ज्यादा फायदा होने के बाद भी सीटों में बढ़ोतरी नहीं हो सकी है। सबसे बुरा हाल रहा कांग्रेस का, जिसके जिलाध्यक्ष मोहम्मद यूनुस सहित तीन प्रत्याशी मिलकर भी गत वर्ष मिले 19 हजार वोटों तक नहीं जुटा सके।
बसपा को वर्ष 2017 में एक लाख 13 हजार 518 वोट मिले थे, जिनमें बागपत विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा 61 हजार 206 वोट मिले थे। बड़ौत और छपरौली सीट पर भी वोटिंग प्रतिशत ठीक था। मगर, इस बार बसपा की सबसे ज्यादा हालत खराब हुई है। केवल 33 हजार 881 वोट ही तीनों विधानसभाओं में मिले है। पांच साल में 79 हजार 637 वोट का भारी नुकसान हुआ है।
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रालोद को वर्ष 2017 में एक लाख 39 हजार 816 वोट मिला था। छपरौली में सबसे ज्यादा 65 हजार 124 वोट थे। इस बार रालोद को दो लाख 97 हजार 183 वोट मिले है। छपरौली में ही एक लाख से ऊपर वोट मिले है। एक लाख 57 हजार 367 वोट का फायदा हुआ है। इसके बाद भी सीट में बढ़ोतरी नहीं हो सकी है।
भाजपा को वर्ष 2017 में दो लाख 33 हजार 295 वोट मिल थे। सबसे ज्यादा 92 हजार 566 वोट बागपत में मिले थे। इस बार भाजपा को दो लाख 74 हजार 723 वोट मिले है। 41 हजार 428 वोट का फायदा हुआ है।
कांग्रेस वर्ष 2017 में सपा से गठबंधन होने के कारण केवल बागपत सीट पर चुनाव लड़ी थी। पिछली बार कांग्रेस को 19 हजार 91 वोट मिली थी, लेकिन इस बार तीनों सीटों के प्रत्याशी मिलकर भी कांग्रेस को इतने वोट नहीं दिला सके। इस बार कांग्रेस को केवल 4 हजार 337 वोट मिले है। 14 हजार 754 वोट का नुकसान हुआ है।
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बागपत विधानसभा में 2017 की स्थिति
भाजपा 92566 (46.83)
बसपा 61206 (30.97)
रालोद 21751 (11)
कांग्रेस 19091 (9.66)
वर्ष 2022 की स्थिति
भाजपा 101420 (47.37)
रालोद 94687 (44.22)
बसपा 12863 (6.01)
कांग्रेस 1229 (0.57)
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बड़ौत विधानसभा में 2017 की स्थिति
भाजपा 79447 (43.09)
रालोद 52941 (28.72)
सपा 28376 (15.4)
बसपा 22071 (11.98)
वर्ष 2022
भाजपा 90931 (46.34)
रालोद 90616 (46.18)
बसपा 11244 (5.73)
कांग्रेस 1849 (0.94)
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छपरौली विधानसभा में 2017 में स्थिति
रालोद 65124 (32.71)
भाजपा 61282 (30.78)
सपा 39841 (20.01)
बसपा 30241 (15.19)
वर्ष 2022
रालोद 111880 (53.3)
भाजपा 82372 (39.24)
बसपा 9774 (4.66)
कांग्रेस 1259 (0.59)
बड़ौत सीट पर नोटा के वोट बदल सकते थे फैसला
बड़ौत सीट पर हार-जीत का फैसला केवल 315 वोट से हुआ है। इस सीट पर नोटा को 579 वोट मिले है। अगर नोटा के वोट फैसला बदल सकते थे। बागपत विधानसभा सीट पर नोटा को 574 वोट मिले जबकि छपरौली सीट पर नोटा को 886 वोट मिले।
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पोस्टल बैलेट में आगे रही भाजपा
बागपत सीट पर पोस्टल बैलेट की सबसे ज्यादा 781 वोट भाजपा के योगेश धामा को मिले। रालोद के अहमद हमीद को 463, बसपा के अरुण कसाना को 59 वोट और कांग्रेस के अनिल देव को 15 वोट मिले। बड़ौत सीट पर भी भाजपा के केपी मलिक को सबसे ज्यादा 864 वोट मिले। रालोद के जयवीर सिंह तोमर को 744, बसपा के अंकित शर्मा को 61 वोट, आम आदमी पार्टी के सुधीर को दस और कांग्रेस के राहुल को नौ वोट मिले। छपरौली सीट पर भाजपा के सहेंद्र सिंह रमाला को 1015 वोट मिले। रालोद के अजय कुमार को 940 वोट मिली। बसपा के साहिक को 34 और कांग्रेस के मोहम्मद यूनुस को 17 वोट मिले।
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