उन्होंने कहा कि सरकार में जो मंत्री बनकर बैठे हैं वे मंदिर-मस्जिद की ओर ध्यान न दें, अपने पद की जिम्मेदारी को समझते हुए उस पर ही कार्य करें। मंदिर-मस्जिद की जिम्मेदारी तो संत-महात्मा, फकीरों की है। वे अपना कार्य कर रहे हैं। सरकार के मंत्री विभाग में मिले पद पर कार्य करें, देश को विकास के रास्ते पर लेकर जाएं, विनाश के रास्ते पर नहीं। देश को बेचने का कार्य न करें।
उन्होंने तीनो कृषि कानून के बारे में कहा कि इसके लिए आंदोलन 13 महीने चला, ये कानून 17 साल पहले बिहार में लागू कर दिए गए थे। 2005 में वहां की मंडियों को बंद कर दिया गया। अब वहा ऐसे हालात हैं कि किसानों को मजदूर बना दिया है। उनके वहां काॅन्ट्रेक्ट फार्मिग होने वाली है। मंडियों को बड़ी कंपनियों को दिया जा रहा है। यही हाल सरकार पूरे देश में करना चाहती है।
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उन्होंने किसानों से एकजुट होकर आंदोलन करने को तैयार रहने का आवाहन करते हुए कहा कि जल्द ही किसानों की समस्याओं को लेकर आंदोलन किया जाएगा। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर में भूमि अधिग्रहण की समस्याओं के निस्तारण को लेकर टीकरी-सूजती चौराहे पर किसानों की महापंचायत में राकेश टिकैत शामिल होने पहुंचे हैं। महापंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत किसानों को संबोधित करेंगे ।